देखो!
दूर खेत में काम कर रही-
उस किसान - बाला को जो -
अकेली ही फसल काटती हुई
और अपने में ही खोई - सी --
गाती जा रही है कोई दुखभरा गीत।
थोड़ी देर रुको,
या चुपचाप गुजर जाओ यहाँ से ।
जरा सुनो!
कैसे यह पूरी घाटी ही -
भर उठी है उसके स्वरों की गूँज से।
शायद ही किसी बुलबुल ने कभी -
गाये हों इतने कर्णप्रिय गीत -
अरब के तपते रेगिस्तान में --
छायादार आश्रय की तलाश में भटकते -
थके - हारे पथिकों के स्वागत में।
वसंत ऋतु में कोयल की आवाज़ भी -
नहीं सुनाई दी है कभी इससे अधिक मधुर --
जब वह गूँजती है सुदूर हेब्रिडीज़ द्वीपों में -
समुद्र के सन्नाटे को भेदती हुई।
क्या कोई मुझे बताएगा कि वह क्या गा रही है?
शायद इन करुण स्वरों का स्रोत -
सुदूर अतीत की स्मृतियों में है -
जैसे कि बहुत पहले हुआ युद्ध,
या वर्तमान की ही कोई अप्रिय घटना --
सहज मानवीय दुःख, हानि,या पीड़ा -
जो पूर्व में कष्ट का कारण रही हो -
और पुनः घटित हो सकती हो।
चाहे जो हो उसके गीत का विषय
पर वह इस तरह गा रही है उसे --
मानो वह कभी समाप्त नहीं होगा।
मैंने देखा उसे काम करते हुए
अपने हँसिये पर झुके -झुके--
और ठिठक कर वहाँ खड़ा मैं,
कुछ देर तक सुनता रहा उसका गीत,
और फिर चलने लगा ऊपर की ओर,
उस संगीत को ह्रदय में लिए, और
देर तक उसकी गूँज बनी रही मन में -
सुनाई देना बंद होने पर भी।
Solitary Reaper --- William Wordsworth 1770-- 1850
विलियम वर्ड्सवर्थ की यह प्रसिद्ध कविता प्रकृति, संगीत और मानवीय संवेदना के अद्भुत सामंजस्य का सुन्दर चित्र प्रस्तुत करती है। स्कॉटलैंड के ग्रामीण परिवेश में एक अकेली युवती खेत में काम करते हुए गीत गा रही है, कविता उसके गीत के बोलों को भले ही न समझ सके किन्तु उसकी मधुर ध्वनि उसके मन पर अमिट प्रभाव छोड़ जाती है। कविता यह दर्शाती है कि कला और संगीत भाषा की सीमा से परे जाकर सीधे मानव -ह्रदय को स्पर्श कर सकते हैं।

1 comment:
बहुत सुंदर मैडम, उसे किस लड़की के अंदर कोई गहरी पीड़ा छुपी हुई है चाहे वह बहुत पहले की हो चाहे वर्तमान में हो चाहे वह भविष्य को याद करते हुए अपने दुख को प्रकट कर रही है और अपने मन ही मन गुनगुना रही है जिससे कि उसका मन शांत हो जाए. जब कोई मनुष्य अपनी पीड़ा को किसी के सामने प्रदर्शित नहीं कर सकता तो वह कोई इसी प्रकार का एकांत ढूंढता है और अपने मन को कुछ गुनगुना के कुछ अंदर से स्वयं बात करके अपनी पीड़ा को कम कर लेता है इस पोयम में मुझे कुछ ऐसा ही लगा है. जो कुछ भी भाव हो मुझे बहुत अच्छा लगा आपके लिए धन्यवाद सादर नमस्कार
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