Sunday, 2 August 2026

My Heart Leaps Up ---- William Wordsworth --- इंद्रधनुष


 असीम आनंद  से उमग उठता है मेरा ह्रदय -

जब भी  देखता हूँ -

आकाश  पटल पर प्रकट होते -

सप्तवर्णी  इंद्रधनुष  को।

 ऐसा होता था जब मैं -

एक छोटा बालक था,

और आज भी, जबकि मैं बड़ा हो गया हूँ, 

ठीक वैसी ही  अनुभूति होती है।


चाहता हूँ कि  ऐसा ही  लगता रहे -

मुझे जीवन के हर पड़ाव  पर -

अन्यथा जीने का अर्थ ही क्या?


बालक ही गढ़ता है  भविष्य के व्यक्ति को -

उसके ही गुण विकसित होकर -

रचना करते हैं एक परिपूर्ण मनुष्य की.।


चाहता हूँ कि बालमन की वह निष्कलुष आस्था -

 सदैव अक्षुण्ण रहे, 

और मेरे जीवन का हर दिन -

 उसी सहज प्रेम और श्रद्धा की डोर से बँधा रहे -

जिसने बचपन से  आज तक -

 मुझे प्रकृति से जोड़े रखा है।


  ( विलियम वर्ड्सवर्थ  की कविता का भावानुवाद )

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