मैं भटक रहा था एकाकी
जैसे पहाड़ियों, घाटियों के ऊपर तैरता
कोई बादल..
तभी अचानकमैंने देखा --
सुनहरे नरगिस फूलों का एक समूह -
झील के किनारे पर -
हवा के झोंकों के साथ -
झूमता, नाचता।
अद्भुत दृश्य था वह!
आकाशगंगा में चमकते, टिमटिमाते
तारों की तरह, वे भी --
फैले हुए थे झील के किनारे,- दूर तक
एक अनंत रेखा में।
एक ही नज़र में मैंने देखा
दस हज़ार फूलों को एक साथ
आनंद में डूबे हुए,
एक साथ सिर हिलाते-
झूमते, नृत्य करते।

No comments:
Post a Comment