Saturday, 15 August 2026

On Children ----- Khalil Gibran

                                                    तुम्हारे  बच्चे 

      

        तुम्हारे बच्चे -

       तुम्हारे नहीं हैं,

     वे तो जीवन की 

    अपनी आकांक्षाओं  के 

       पुत्र -पुत्रियाँ हैं।

       वे दुनिया में आतेअवश्य हैं तुम्हारे माध्यम से 

        पर लाये नहीं जाते तुम्हारे द्वारा,

        और भले ही वे तुम्हारे साथ हैं

        उन पर  तुम्हारा  कोई अधिकार नहीं.


        तुम उन्हें अपना प्रेम दे सकते हो 

        किन्तु  उन पर अपने विचार थोप नहीं सकते 

      अपने जीवन में आश्रय दे सकते हो उनके शरीर को 

       किन्तु उनकी आत्मा को नहीं 

       क्योंकि वह निवास करती है भविष्य के भवन में 

      जहाँ तुम कभी नहीं जा सकते,-- स्वप्न में भी।


          तुम उनके जैसा बनने का प्रयास कर सकते हो -

         किन्तु उन्हें अपने जैसा बनाने की इच्छा न करना -

          क्योंकि जीवन कभी पीछे की ओर नहीं जाता -

        और न ही कभी ठहरता है --

        बीते हुए कल के साथ।


             तुम  वह  धनुष हो, जिसके द्वारा  तुम्हारे बच्चे -

              भेजे जाते हैं आगे, जीवंत बाणों की तरह -

              वह अदृश्य धनुर्धर सुनिश्चित करता है -

               अनंत पथ  में कोई एक लक्ष्य --

              और फिर साधता है तुम्हे अपनी शक्ति से इस तरह,

               कि  वेग से दूर तक जा सकें उसके बाण.


                उस धनुर्धर के हाथों  सौंप देना तुम स्वयं को

                 सहर्ष  और 

                 निश्चिन्त  हो कर 

                क्योंकि  वह तुम्हे भी उतना ही प्यार करता है 

                 जितना उन दूर जाते बाणों को।



No comments: