Friday, 21 August 2026

Daffodils -- I wandered Lonely as a Cloud --William Wordsworth

                                                     

           मैं  भटक रहा था वहाँ अकेला -

          पहाड़ियों, घाटियों के ऊपर तैरते  -

           किसी बादल की तरह।


     तभी मैंने देखा झील के किनारे खिले -

      सुनहरे नरगिस फूलों का एक समूह -

      जो हवा के झोंकों  के साथ -- 

     झूमता हुआ नाच रहा था।


         अद्भुत दृश्य था वह!

      आकाशगंगा में चमकते, टिमटिमाते -

        तारों की तरह वे भी फैले हुए थे-

         झील के किनारे, दूर तलक -

         एक अनंत रेखा में सजे हुए।


          एक ही नज़र में मैंने देखा -

         दस हज़ार फूलों को  एक साथ -- 

         आनंद में डूबे हुए,

         एक साथ सिर हिलाते,

              झूमते, नाचते।


           यूँ तो उनके पास ही झील में -

            लहरें भी नृत्य कर रहीं थीं -

           किन्तु इन पीले फूलों की ख़ुशी -

       उनकी चमक को कहीं पीछे छोड़ रही थी।


             ऐसी आनंदमयी संगति में भला -

               कवि कैसे न प्रमुदित  होता?



                 मैं वहाँ खड़ा, खड़ा निहारता रहा -

                 निहारता रहा देर तक --

                  बिना यह सोचे कि उसने मुझे -

                 किस अपूर्व आनंद - धन से-

                   समृद्ध कर दिया है।

                    क्योंकि उस दिन के बाद,

                   जब भी मैं होता हूँ फुर्सत  के पलों में,

                    अथवा  गहन विचारों में डूबा ,

                    वे सुन्दर फूल मेरे कल्पना - लोक में - 

                     एकांत के उसअद्भुत आनंद में --

                     एक बार फिर खिल उठते हैं,

                    और आह्लाद से भर देते हैं मेरे ह्रदय को इस तरह-

                     कि वह भी नाच उठता है उनके साथ

                      अनायास ही!!




"I wandered lonely as a cloud " .....  William Wordsworth's poem 
Transcreated into Hindi 


Daffodils, जिसका मूल शीर्षक I wandered Lonely as a Cloud  है, अंग्रेज़ी के महान रोमांटिक कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की अत्यंत लोकप्रिय  प्रकृति - कविताओं में से एक है। इसमें कवि प्रकृति के सान्निध्य से प्राप्त आनंद और सौंदर्य का मनोरम चित्र प्रस्तुत करता है। झील के किनारे हवा में लहराते असंख्य नरगिस के फूलों का दृश्य कवि के मन को  गहरे आनंद से भर देता है। बहुत समय पश्चात् भी एकांत के क्षणों में उस दृश्य की स्मृति उसे पुनः प्रसन्नता और आत्मिक शांति प्रदान करती है। वर्ड्सवर्थ की यह कविता प्रकृति और मानव - मन के मधुर सम्बन्ध तथा स्मृतियों की आनंददायी शक्ति का सुन्दर उदाहरण है।



No comments: