जब - जब मैं भागता हूँ उन चीज़ों के पीछे -
जिन्हें मैं अपने लिए वांछनीय समझता हूँ -
तब -तब मेरा जीवन निराशा और भ्रम के-
अंधकार से भर जाता है।
किन्तु यदि उनके पीछे भागना बन्द कर -
ठहर जाता हूँ अपनी जगह धैर्य पूर्वक --
तो जो भी मुझे चाहिए --
मेरी ओर स्वतः ही प्रवाहित होने लगता है-
बिना किसी कष्ट के।
यह अनुभव मुझे सिखाता है -
कि जिसे मैं पाना चाहता हूँ -
वह भी आना चाहता है मेरे पास,
वह भी मुझे ढूँढ़ रहा है,
और खींच रहा है अपनी ओर।
एक गहरा रहस्य छिपा है इस बात में -
उन सबके लिए -
जो इसे समझ सकते हैं।
Transcreation of " when I Run After The Things " by
Sufi mystic poet Jalaluddin Rumi (1207-- 1273)
सूफ़ी संत कवि रूमी की यह चिंतनपरक रचना मनुष्य को इच्छाओं और उपलब्धियों के पीछे भागते रहने की प्रवृत्ति पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।रूमी के अनुसार बाहरी वस्तुओं और क्षणभंगुर सफलताओं की निरंतर खोज मन को अशांत करती है, जब कि जीवन की सच्ची सम्पन्नता आत्मिक संतुलन और सहजता में निहित है। यह कविता हमें अपने भीतर झाँकने, अनावश्यक दौड़ से बचने और जीवन के स्वाभाविक प्रवाह पर विश्वास रखने का सन्देश देती है।

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