Thursday, 13 August 2026

The Solitary Reaper ----- Williaam Shakespeare हिंदी भावानुवाद भावानुवाद

   


 


   देखो!

  दूर  खेत में काम कर रही

  उस किसान - बाला को,

   जो अकेली ही फसल काट रही है  

  और अपने में ही खोई - सी --

 गाती जा रही है कोई दुखभरा गीत।

   थोड़ी देर रुको,

  या चुपचाप गुजर जाओ यहाँ से ।


    सुनो!

   कैसे यह सारी घाटी ही -

    भर उठी है उसके स्वरों की गूँज से।


   शायद ही किसी बुलबुल ने कभी -

   गाये हों इतने  कर्णप्रिय गीत -

 अरब के तपते रेगिस्तान में --

  छायादार आश्रय की तलाश में भटकते -

  थके - हारे  पथिकों के स्वागत में।


  वसंत ऋतु में 

  कोयल की आवाज़ भी 

  नहीं  सुनाई दी है कभी 

 इससे अधिक मधुर --

 जब वह गूँजती है 

 सुदूर हेब्रिडीज़ द्वीपों में -

समुद्र के सन्नाटे को -

   भेदती हुई।



क्या कोई मुझे बताएगा -

कि वह क्या गा रही है?

शायद इन करुण स्वरों का स्रोत -

सुदूर अतीत की स्मृतियों में  है -

जैसे कि बहुत पहले हुआ युद्ध,

या वर्तमान  की ही  कोई अप्रिय घटना --

 सहज मानवीय  दुःख, हानि,या पीड़ा -

जो पूर्व  में कष्ट का कारण रही हो -

 और पुनः  घटित हो सकती हो।

 

चाहे जो हो उसके गीत का विषय 

पर वह  इस तरह गा रही है   --

मानों वह कभी समाप्त नहीं होगा।



  मैंने देखा उसे काम करते हुए 

 अपने हँसिये पर झुके -झुके--

  और ठिठक कर वहाँ  खड़ा मैं 

 कुछ देर तक  सुनता रहा  उसका गीत,

 और फिर चलने लगा ऊपर  की  ओर,

  उस संगीत  को  ह्रदय में लिए --

   देर तक उसकी गूँज बनी रही मन में 

   सुनाई  देना बंद होने पर भी.

   


   




No comments: