अधूरा जीवन मत जियो.
और न ही मरो अधूरी मृत्यु
शांत रहना चुनो
तो पूरी तरह शांत रहो
किन्तु जब बोलना हो
तो तब तक बोलते रहो
जब तक तुम्हारी बात
पूरी न हो जाए.
यदि स्वीकार करते हो किसी बात को
तो अपनी स्वीकृति को,
स्पष्ट रूप से व्यक्त करो
न कि किसी आवरण के पीछे छिपा कर।
यदि अस्वीकार करते हो
तो भी स्पष्ट रहो ऐसा करने में
क्योंकि अस्पष्ट अस्वीकार --
एक कमज़ोर स्वीकार जैसा ही होता है.
अधूरे समाधान को स्वीकार न करो
और न ही विश्वास करो अधूरे सत्य पर
अधूरे सपने मत देखो, और न कल्पना करो
अधूरी आशाओं के पूरी होने की।
अधूरा रास्ता तुम्हें कहीं नहीं पहुँचाएगा
याद रहे तुम स्वयं एक पूर्ण अस्तित्व हो
जो इस संसार में आया है
एक पूर्ण जीवन जीने के लिए
न कि अधूरा रह जाने के लिए।

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