Induja
Saturday, 19 September 2026
Nirjharini: नदी का भय
Tuesday, 15 September 2026
हँसो, और दुनिया हँसेगी तुम्हारे साथ
हँसो और सारी दुनिया हँसेगी तुम्हारे साथ
जब तुम हँसते हो -
तो सारा विश्व हँसता है तुम्हारे साथ
किन्तु जब रोते हो -
तो होते हो नितांत अकेले -
क्योंकि इस बूढी धरती को
जरुरत है अपने लिए खुशियों की,
कष्ट तो उसके आंचल में -
पहले ही बहुत हैं।
गाओ, और पहाड़ियाँ तुम्हें उत्तर देंगी
किन्तु तुम्हारी आहें तो
हवा में ही खो जाएँगी।
आनंदी स्वरों को ही मिलती हैं-
प्रतिध्वनियाँ,
दुखभरी आवाज़ की परवाह -
भला कौन करता है!
आनंद - उत्सव मनाओ,
और लोग ढूँढ लेंगे तुम्हें,
किन्तु जब शोक में होगे --
तो दूर चले जाएँगे पीठ फेर कर।
तुम्हारे आनंद में सभी चाहते हैं हिस्सा -
किन्तु दुःख बँटाने को कोई नहीं आता आगे -
तुम खुश हो तो मित्र अनेक होंगे तुम्हारे -
किन्तु दुःख की घडियों में -
अकेला छोड़ जाएँगे सभी।
आनंद के विशाल कक्ष में -
जगह होती बहुत सारे लोगों के लिए,
लम्बी, भव्य कतारों के लिए,
किन्तु दुःख के संकरे गलियारों में -
अकेले ही गुज़रना होता है सब को
एक, एक करके।
Transcreated from the original poem "Laugh and the World Laughs with You" by Ella Wheeler Wilcox 1850-1919
अमेरिकी कवयित्री एला व्हीलर विलकॉक्स की इस लोकप्रिय कविता का मूल सन्देश सरल होते हुए भी बहुत गहरा है-- हमारे भाव और हमारा व्यवहार आस - पास के वातावरण को प्रभावित करते हैं. कवयित्री हँसी और प्रसन्नता को बाँटने की प्रेरणा देती हैं और बताती हैं कि आनंद साझा करने से बढ़ता है। इसके विपरीत, दुःख और एकांत का अनुभव प्रायः अधिक निजी और भीतर समाया हुआ होता है। यह कविता हमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और अपने व्यवहार से संसार में प्रसन्नता भरने का सन्देश देती है. इसकी सरल भाषा और लयात्मकता इसे आज भी अत्यंत प्रभावी बनाती है।
Sunday, 13 September 2026
पहाड़ी रास्ता
क्या यह पहाड़ी रास्ता -
बार - बार मुड़ता जाएगा?
हाँ, अपने अंतिम पड़ाव तक।
क्या यह यात्रा-
पूरे दिन चलती रहेगी?
हाँ, मेरे दोस्त, सुबह से शाम तक।
किन्तु रात में विश्राम के लिए -
कोई ठौर तो होगा न?
हाँ, मिलेगी एक छत,
जब अंधेरा उतरने लगेगा।
क्या अँधेरे में -
मैं उसे देख पाऊँगा?
तुम उसे अवश्य देख लोगे।
क्या वहाँ मुझे -
कुछ और यात्री भी मिलेंगे?
हाँ, वे -
जो तुमसे पहले वहाँ पहुँच चुके हैं.
तो क्या मुझे -
द्वार खटखटाना या उन्हें -
पुकारना होगा?
नहीं, वे तुम्हें प्रतीक्षा नहीं कराएँगे।
क्या यात्रा की थकान से-
शिथिल हुए मेरे शरीर को -
आराम मिलेगा वहाँ?
हाँ,
तुम्हारे श्रम का उचित प्रतिफल,
तुम्हें अवश्य मिलेगा।
क्या वहाँ शैयायें होंगी -
मेरे और आने वाले अन्य सब के लिए?
हाँ, पर्याप्त शैयायें हैं -
उन सब के लिए --
जो वहाँ आते हैं।
Transcreated from the original Poem " Up-- Hill "---- by Christina Rossetti -1830-- 1894
Christina Rossetti की यह कविता जीवन - यात्रा को एक कठिन
ऊँचाई की ओर बढ़ते मार्ग के रूपक में प्रस्तुत करती है यहाँ एक यात्रीऔर पथ -प्रदर्शक के बीच एक संवाद चलता है। यात्री प्रश्न करता है और उसका गाइड अपने उत्तरों से उसको आश्वस्त करता है। इस संवाद के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों, थकान और अंतिम विश्राम की ओर संकेत किया गया है। मार्ग चाहे कितना ही लम्बा और कठिन क्यों न हो, यात्री के लिए सहारा और विश्रामके लिए स्थान उपलब्ध है। इस सरल संवाद में जीवन के संघर्ष के साथ एक गहरी आध्यात्मिक आश्वस्ति जुड़ी हुई है कि हमें कठिन यात्रा से घबराने के बजाय विश्वास और धैर्य के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए।
Saturday, 12 September 2026
नई विशाल प्रतिमा
Thursday, 10 September 2026
मुझे प्रिय हैं सारी सुन्दर चीजें
संसार की समस्त सुन्दर वस्तुओं से प्रेम करता हूँ मैं -
उन्हें खोजता हूँ और पूजता हूँ - --
ईश्वर की प्रशंसा करने का
इससे बेहतर कोई ढंग --
मुझे नहीं आता।
और आपा - धापी भरे इस जीवन में
इन्ही के द्वारा मिलता है मनुष्य को सम्मान।
चाहता हूँ, मैं भी बनाऊँ कुछ ऐसा -
जो हो सुन्दर और सराहनीय -
और आनंद का अनुभव करुँ -
ऐसा करने में -
भले ही आने वाले कल में -
मेरी रचनाएँ प्रतीत हों -
नींद से जागने पर स्वप्न के निरर्थक शब्दों जैसी।
Transcreated from the poem "I Love All Beauteous Things " by Robert Bridges 1844--1930
रौबर्ट ब्रिजेस की यह कविता सौंदर्य के प्रति प्रेम को एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करती है। कवि के लिए संसार की सुन्दर वस्तुओं को खोजना, उन्हें नमन करना, उनके माध्यम से ईश्वर की स्तुति करना -- ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा है। यहाँ केवल सुंदरता को देखने की आकांक्षा ही नहीं, अपितु स्वयं कुछ सुन्दर और सराहनीय रचने की विनम्र इच्छा भी व्यक्त होती है। कवि स्वीकार करता है कि भविष्य में उसकी रचनाएँ निरर्थक स्वप्नों जैसी प्रतीत हो सकती हैं, फिर भी सृजन की उसकी आकांक्षा क्षीण नहीं होती।
Tuesday, 8 September 2026
वे उसके योद्धा का निष्प्राण शरीर घर लेकर आए
वे उसके योद्धा का निष्प्राण शरीर -
घर लेकर आये थे -
किन्तु यह देखकर भी --
वह न तो मूर्च्छित हुई,
और न ही किया उसने -
करुण विलाप।
सारी सेविकायें स्तब्ध थीं उसकी स्थिति देख -
"उसे रोना होगा, वरना वह मर जायेगी ",
उन्होंने कहा।
वे उस योद्धा की प्रशंसा करने लगीं -
धीमी , कोमल आवाज़ में --
कि वह बहुत प्यारा इंसान था,
सबसे सच्चा दोस्त था और साथ ही-
एक आदर्श दुश्मन भी।
तब भी,वह न तो कुछ बोली -
और न तनिक भी विचलित हुई।
एक सेविका चुपचाप उठकर शव के पास गई,
और उसके चेहरे से कपड़ा हटा दिया,
फिर भी वह न तो हिली और न रोई।
तब,नब्बे वर्ष की एक नर्स उठी -
और मृत योद्धा के बच्चे को लाकर --
रख दिया उसकी गोद में!
और लो!
ग्रीष्म के तूफान की तरह
आँसुओं की धारा बह निकली
उसकी आँखों से-
" मेरे प्यारे बच्चे! मैं जिऊँगी -
जिऊँगी तेरे लिए "--
कहते हुए।
Transcreated from the poem " Home They Brought her Warrior Dead " by Alfred Lord Tennyson
Alfred Lord Tennyson (1809- 1892) की यह मार्मिक रचना युद्ध, प्रेम, शोक और मातृत्व की अद्भुत मनोवैज्ञानिक अभिव्यक्ति है। कविता में एक वीर योद्धा की पत्नी अपने पति की मृत्यु का समाचार पाकर और उसके निष्प्राण शरीर को देखकर भी आँसू नहीं बहाती। उसके आस - पास उपस्थित लोग उसके इस अस्वाभाविक मौन से चिंतित हो उठते हैं. कई तरह के उपाय करने पर भी उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अंत में जब एक वृद्धा नर्स उसके नन्हें बच्चे को लाकर उसकी गोद में डाल देती है तो उसके भीतर दबा हुआ दुःख आँसुओं के रूप में फूट पड़ता है, और जाग उठता है जीवन जीने का संकल्प भी । कविता अत्यंत संवेदनशील ढंग से दर्शाती है कि गहनतम शोक के क्षणों में भी मातृत्व जीवन को थाम लेने की शक्ति और आगे बढ़ने के कारण प्रदान करता है।
Saturday, 5 September 2026
जीवन की स्वर - लहरियाँ
किसी को भी यह प्रार्थना नहीं करनी चाहिए -
कि उसे कभी कोई दुःख न पहुँचे -
न ही यह कि वह सदा कष्टों से मुक्त रहे -
क्योंकि आज की कड़वाहट ही -
कल की मिठास है --
और एक पल की हानि -
हो सकती है जीवन भर का लाभ।
किसी वस्तु का अभाव उसी तरह --
द्विगुणित कर देता है उसके मूल्य को -
जैसे भूख की अग्नि बढा देती है -
भोजन से मिली तृप्ति का सुख।
सुख के आगमन पर केवल वही ह्रदय-
मना सकता है सच्चे आनंद का उत्सव,
जिसने दुखों और कष्टों का भरपूर --
अनुभव किया हो।
दुःख, अभाव, तड़प और संघर्ष की
कटु, कठोर परीक्षाओं से --
किसी भी मनुष्य को भागना नहीं चाहिए -
क्योंकि आत्मा के संगीत के सारे दुर्लभ राग -
जीवन के इन्ही छोटे छोटे स्वरों में -
मुखरित होते हैं।
Transcreated from the poem " Life's Harmonies " by -- Ella Wheeler Wilcox --1850--1919
एल्ला व्हीलर विलकॉक्स की यह कविता जीवन के सुख - दुःख,आशा - निराशा, और संघर्ष - विराम के बीच संतुलन को रेखांकित करती है. कवयित्री का विश्वास है कि जीवन की सम्पूर्णता केवल सुखद अनुभवों से नहीं बनती, इसके विविध और विपरीत अनुभव मिलकर ही जीवन का मधुर संगीत रचते हैं। जिस प्रकार संगीत में अलग - अलग स्वरों का सामंजस्य एक सुन्दर राग की रचना करता है, उसी प्रकार जीवन के प्रकाश और छाया, मिलन और विरह, सफलता और विफलता हमारे अनुभवों को सम्पूर्ण बनाते हैं। यह कविता हमें जीवन को उसकी समग्रता में स्वीकार करने तथा प्रत्येक परिस्थिति में निहित सौंदर्य और सीख को पहचानने की प्रेरणा देती है।




