जीवन कोई कपोल - कल्पना नहीं
एक ठोस यथार्थ है
गंभीर और सार्थक।
क़ब्र ही नहीं इसका अंतिम लक्ष्य
" मिट्टी हो तुम, और मिट्टी में ही लौटोगे "
यह कथन शरीर के लिए था,
आत्मा के लिए नहीं।
दुःख भरे स्वरों में -
यह मत बताओ मुझे --
कि जीवन एक खोखला सपना है,
क्योंकि सोई रहने वाली आत्मा -
मृतक के समान है,
और सब कुछ जैसा दिखता है
वैसा हमेशा होता नहीं।
सदैव आमोद - प्रमोद में लिप्त रहना -
या दुःख में ही डूबे रहना,
नहीं हैं जीवन के मार्ग या लक्ष्य -
किन्तु कर्तव्य - पथ पर कुछ ऐसे चलना,
कि आने वाला हर दिन हमें पाए -
बीते दिन की तुलना में कुछ और आगे।
कला चिर - स्थायी है और समय गतिमान,
यद्यपि हमारे ह्रदय दृढ और साहसी हैं,
फिर भी वे बज रहे हैं उदास स्वरों में,
क़ब्र की ओर बढ़ती अंतिम यात्रा के -
मंद -मंद आवाज़ वाले --
ढोलों की तरह।
संसार के इस विराट युद्ध - क्षेत्र में,
जीवन के इस अस्थायी पड़ाव में,
तुम नहीं बनना वे गूंगे मवेशी,
जो हाँके जाते दूसरों के द्वारा,
बल्कि बनना स्वयं नायक, इस सारे संघर्ष के।
प्रतीत हो भविष्य कितना भी आकर्षक ,
. भरोसा कभी न करना तुम इस पर,
बीते हुए कल को भी जाने दो अतीत में,
कर्म में जुटे रहो बस इसी वर्तमान में,
मन में उमंग और प्रभु में विश्वास लिए।
महान लोगों के जीवन दिलाते हमें याद,
कि हम भी बना सकते जीवन को सार्थक,
और अपने पद - चिह्न भी - जाते - जाते
छोड़ सकते हैं
समय की रेत पर।
वे पद -चिह्न जिन्हे देखने पर
जीवन - संघर्ष में टूटे जहाज का
कोई अकेला, निराश, दुखी यात्री
फिर बाँध सके हिम्मत आगे बढ़ने की।
तो आओ, हम सब उठ कर
जुट जायें अपने काम में
हो कर तैयार कुछ भी झेलने को
निरंतर उपलब्धियाँ करते हुए अर्जित
आगे ही आगे बढ़ते रहें निरंतर
सीखते हुए कठोर परिश्रम करना
और करना प्रतीक्षा फल की धैर्य पूर्वक।
H. W. Longfellow.
( A Transcreation )