यह एक सुन्दर शाम है --
शांत और स्वतंत्र।
और समय प्रतीत होता है--
ईश्वर के ध्यान में साँस रोके डूबी -
सन्यासिनी की तरह-
पवित्र और निश्चल।
उधर वह विशाल सूरज -
डूब रहा है अपनी परम शांति में -
और आकाश की कोमलता -
छा रही है सागर के पटल पर।
सुनो!
वह परम चेतना जाग उठी है,
और अपनी शाश्वत गति से निरंतर --
उत्पन्न कर रही है
घनघोर गर्जन
प्यारी बच्ची! प्यारी बालिका!
तुम जो चाल रही हो मेरे साथ -
इस सागर - तट पर -
यदि तुम इन गंभीर विचारों से -
अछूती लगती हो -
तो भी तुम्हारी अपनी प्रकृति -
कम अलौकिक नहीं है।
तुम तो वर्ष भर विश्राम करती हो -
स्वयं परमेश्वर की गोद में -
और आराधना करती हो उसकी -
इस पावन मंदिर के गर्भ - गृह में,।
ईश्वर तुम्हारे साथ रहता है सदैव,
तब भी, जब हम यह नहीं जान पाते।
विलियम वर्ड्सवर्थ की कविता 'It is a Beauteous Evening ' का भावानुवाद


