Induja
Sunday, 30 August 2026
SUCCESS -- R. W. EMERSON
Saturday, 29 August 2026
ब्रह्म
यदि हन्ता यह समझता है कि वह मारता है
और जिसे मारा गया वह सोचता है
कि वह मारा गया,
तो वे अनभिज्ञ हैं मेरे सूक्ष्म विधान से -
जिसके प्रारम्भ, अंत और पुनरागमन में
मैं ही सम्मिलित हूँ.
मेरे निकट है वह भी जो मुझसे दूर है,
या भुलाया जा चुका है,
छाया या सूर्य का प्रकाश --
दोनों एक समान हैं मेरे लिए।
विलुप्त हो चुके देवताओं को भी -
देख लेता हूँ मैं।
यश - अपयश, मान - अपमान में
मेरे लिए कोई भेद नहीं।
वे भ्रम में हैं जो मुझे अपने से भिन्न समझते हैं
जब वे मुझसे दूर भागते हैं, तो -
उन्हें भगाने वाले पँख भी मैं ही हूँ,
मैं ही संदेह हूँ और संदेह करने वाला भी
और ब्राह्मण जिस मन्त्र का गान करते हैं
वह भी मैं ही हूँ।
शक्ति - संपन्न देवता भी आकुल हैं
मेरे धाम को पाने के लिए
और वे पवित्र सप्त - ऋषि भी तो
मेरी ही खोज में भटक रहे हैं।
किन्तु तुम, हे अच्छाई के विनम्र प्रेमी!
केवल मुझे ढूंढो और पीठ फेर लो -
स्वर्ग की ओर से।
R. W. Emerson ki 'Brahman' sheershak kavita ka bhawanuwad
Friday, 28 August 2026
Song Of Myself -1 ---- Walt Whitman (आत्म - गान )
मैं अपने आप का उत्सव मनाता हूँ,
स्वयं के गीत गाते हुए -
और समझता हूँ कि जो मैं मानता हूँ -
तुम भी वही मानते होगे,
क्योंकि हर परमाणु जो मुझमें है -
वह तुम्हारा भी उतना ही है -
जितना मेरा।
मैं विचरता रहता हूँ निरुद्देश्य, निश्चिंत --
और आमंत्रित करता हूँ अपनी आत्मा को।
कभी - कभी आराम से झुककर देखता हूँ
ग्रीष्म की घास के नुकीले सिरों को भी।
मेरी जिह्वा, मेरे रक्त की हर बूँद -
बनी है इसी मिट्टी से, इसी हवा से,
मैं संतान हूँ इसी मिट्टी में जन्मे माता - पिता की -
जिनके माता - पिता और उनके भी माता - पिता --
यहीं जन्मे थे।
मैं,सैंतीस वर्ष का पूर्ण स्वस्थ पुरुष,-
आशा करता हूँ कि जीवन - प्रवाह में -
इसी तरह बहता रहूँगा
जब तक मृत्यु आकर मुझे रोक न दे।
कुछ समय के लिए पीछे हट कर
उन धार्मिक सम्प्रदायों --
और सामाजिक मान्यताओं से -
जो पर्याप्त होते हुए भी -
अब प्रासंगिक नहीं रहे, किन्तु -
उन्हें अभी तक भुलाया नहीं गया है।
मैं प्रश्रय देता हूँ -
अच्छे और बुरे दोनों को ही -
और जोखिम उठा कर भी -
उन्हें बोलने की अनुमति देता हूँ -
पूरी स्वतंत्रता के साथ-
अपनी मौलिक ऊर्जा के साथ बहती हुई -
प्रकृति की तरह।
Song Of Myself ---- आत्म - गान --- वाल्ट व्हिटमैन की कविता का भावानुवाद
Wednesday, 26 August 2026
On Love ---- Khalil Gibran
Monday, 24 August 2026
Do Not Live A Half Life -- Khalil Gibran
अधूरा जीवन मत जियो.
और न ही मरो अधूरी मृत्यु
शांत रहना चुनो
तो पूरी तरह शांत रहो
किन्तु जब बोलना हो
तो तब तक बोलते रहो
जब तक तुम्हारी बात
पूरी न हो जाए.
यदि स्वीकार करते हो किसी बात को
तो अपनी स्वीकृति को,
स्पष्ट रूप से व्यक्त करो
न कि किसी आवरण में छिपा कर।
यदि अस्वीकार करते हो
तो भी स्पष्ट रहो ऐसा करने में
क्योंकि अस्पष्ट अस्वीकार --
एक कमज़ोर स्वीकार जैसा ही होता है.
अधूरे समाधान को स्वीकार न करो
और न ही विश्वास करो अधूरे सत्य पर
अधूरे सपने मत देखो, और न कल्पना करो
अधूरी आशाओं के पूरे होने की।
अधूरा रास्ता तुम्हें कहीं नहीं पहुँचाएगा
याद रहे तुम स्वयं एक पूर्ण अस्तित्व हो
जो इस संसार में आया है
एक पूर्ण जीवन जीने के लिए
अधूरा रह जाने के लिए नहीं।
When I Run After what Think I want --- Rumi
जब - जब मैं भागता हूँ उन चीज़ों के पीछे
जिन्हें मैं अपने लिए वांछनीय समझता हूँ
तब -तब मेरा जीवन निराशा और भ्रम के
अंधकार से भर जाता है।
किन्तु यदि उनके पीछे भागना बन्द कर
ठहर जाता हूँ अपनी जगह धैर्य पूर्वक --
तो जो भी मुझे चाहिए --
मेरी ओर स्वतः ही प्रवाहित होने लगता है
बिना किसी कष्ट के।
यह अनुभव मुझे सिखाता है
कि जिसे मैं पाना चाहता हूँ
वह भी आना चाहता है मेरे पास,
वह भी मुझे ढूँढ़ रहा है,
और खींच रहा है अपनी ओर।
एक गहरा रहस्य छिपा है इस बात में
उन सबके लिए
जो इसे समझ सकते हैं।
सूफ़ी कवि रूमी की कविता का भावानुवाद
Sunday, 23 August 2026
Let Go Of Your Worries - Rumi ---- अपनी चिंताओं को जाने दो
अपनी चिंताओं को जाने दो -
और बनो पूर्णतः निर्मल -हृदय -
एक दर्पण के सदृश -
जिसमें कोई छवि नहीं होती।
यदि तुम्हें एक स्वच्छ दर्पण चाहिए -
तो अपने आप को देखो -
और देखो उस निर्लज्ज सच्चाई को -
जो दर्पण तुम्हें दिखाता है।
और सोचो --
यदि धातु का एक टुकड़ा -
चमकाया जा सकता है -
एक दर्पण की तरह -
तो हृदय के दर्पण को चमकाने के लिए -
तुम्हें क्या चाहिए होगा?
सूफ़ी कवि रूमी की कविता का भावानुवाद






