मैं अपने आप का उत्सव मनाता हूँ, स्वयं के गीत गाते हुए -
और समझता हूँ कि जो मैं मानता हूँ -
तुम भी वही मानते होगे,
क्योंकि हर परमाणु जो मुझमें है -
वह तुम्हारा भी उतना ही है -
जितना मेरा।
मैं विचरता रहता हूँ निरुद्देश्य, निश्चिंत --
और आमंत्रित करता हूँ अपनी आत्मा को।
कभी - कभी आराम से झुककर देखता हूँ
ग्रीष्म की घास के नुकीले सिरों को भी।
मेरी जिह्वा, मेरे रक्त की हर बूँद -
बनी है इसी मिट्टी से, इसी हवा से,
मैं संतान हूँ इसी मिट्टी में जन्मे माता - पिता की -
जिनके माता - पिता और उनके भी माता - पिता --
यहीं जन्मे थे।
मैं,सैंतीस वर्ष का पूर्ण स्वस्थ पुरुष,-
आशा करता हूँ कि जीवन - प्रवाह में -
इसी तरह बहता रहूँगा
जब तक मृत्यु आकर मुझे रोक न दे।
कुछ समय के लिए पीछे हट कर
उन धार्मिक सम्प्रदायों --
और सामाजिक मान्यताओं से -
जो पर्याप्त होते हुए भी -
अब प्रासंगिक नहीं रहे, किन्तु -
उन्हें अभी तक भुलाया नहीं गया है।
मैं प्रश्रय देता हूँ -
अच्छे और बुरे दोनों को ही -
और जोखिम उठा कर भी -
उन्हें बोलने की अनुमति देता हूँ -
पूरी स्वतंत्रता के साथ-
अपनी मौलिक ऊर्जा के साथ बहती हुई -
प्रकृति की तरह।
Song Of Myself ---- आत्म - गान --- वाल्ट व्हिटमैन की कविता का भावानुवाद
परिचय :--
Song Of Myself अमेरिकी कवि वाल्ट व्हिटमैन की महान काव्य -कृति Leaves of Grass
की सर्वाधिक चर्चित कविताओं में से एक है। इस कविता में कवि व्यक्ति और समस्त मानवता के बीच गहरे आत्मिक सम्बन्ध का उत्सव मनाता है.। व्हिटमैन का 'मैं ' केवल उसका व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव - समाज और प्रकृति का प्रतीक बन जाता है। यहाँ कविता आत्म--स्वीकृति, स्वतंत्रता, समानता और जीवन के प्रति उल्लासपूर्ण दृष्टि को व्यक्त करती है। मुक्त छंद में रचित यह कविता मानव की गरिमा तथा प्रत्येक जीवन के अद्वितीय महत्व का सन्देश देती है। Song of Myself आत्मा की व्यापकता और समस्त सृष्टि के साथ मनुष्य की एकात्मकता का सशक्त काव्य है।