Tuesday, 5 May 2026

यदि तुम...


   यदि तुम  रख सको स्वयं  को संयत -

  जब तुम्हारे आस -पास के लोग -

   आत्म - नियंत्रण खो रहे हों --

  और मढ़ रहे हों सारा दोष  तुम पर.


    जब सब तुम पर संदेह करें -

    किन्तु तुम बनाये रखो आत्मविश्वास -

     उनके संदेह को भी -

     ध्यान में रखते हुए.


    

      तुम प्रतीक्षा करो  बिना रुके,थके -

     झूठ का शिकार  बनने पर भी -

      बदले में झूठ का सहारा न लो -

      घृणा  किये जाने पर भी -

      घृणा करने से बच सको -

     किन्तु कोशिश न करो  कभी 

   अत्यधिक भला और समझदार दिखने की 


   यदि तुम सपने देखो -

   किन्तु उनके वश में हो जाने से बचो -

  विचारों का स्वागत तो करो -

   किन्तु उनमें ही उलझकर न रह जाओ.


यदि हार और जीत दोनों को ही -

एक समान भ्रामक मान सको -

  और  करो दोनों  स्थितियों  को -

      समभाव से स्वीकार.


यदि सह सको अपनी कही सत्य बातों को -

किन्ही कुटिल जनों द्वारा -

तोड़ मरोड़ कर, भोले लोगों को -

फँसाने हेतु प्रयोग होते देखना.


यदि जीवन भर के परिश्रम से बनी -

चीजों को टूटा देख,

 बिना  विचलित हुए झुक कर -

जुट सको उन्हें फिर  से जोड़ने में.


यदि अपनी सारी कमाई को  इकठ्ठा कर -

 एक साथ दाँव पर लगा सको  -

  हार या जीत के लिये,

  और सब कुछ हार बैठो.

 

किन्तु फिर भी सब  भूलकर -

कर सको एक नई शुरुआत -

अपने भारी नुकसान का -

ज़िक्र तक किये बिना ।


यदि तन, मन और मस्तिष्क को -

उनके थक जाने के बाद भी -

काम पर लगाए रखो -

और बने रहो उनके साथ-


 जब तक शेष न हो जाये -

तुम्हारी  अपनी संकल्प शक्ति -

जो कहती रहती है निरंतर -

 " रुको मत, डटे रहो ".


यदि तुम  भीड़  के बीच भी -

अपने गुण बनाये रख सको -

और राजाओं की संगति में भी -

 बने रहो  साधारण जन.


 यदि आहत न कर पायें -

 तुम्हें तुम्हारे शत्रु -

 अथवा परम स्नेही मित्र -

तुम विश्वास करो सब पर -

किन्तु अत्यधिक किसी पर नहीं.



 अपने अमूल्य समय के हर मिनट की -

     पूरे साठ क्षणों की अवधि  को -

    सार्थकता से  भर कर सको.


तो यह धरती, और उस पर जो कुछ है -

सब तुम्हारा हो जायेगा -

और उस से भी  बढ़ कर -

तुम बन जाओगे एक सच्चे मनुष्य, 

मेरे प्यारे बेटे!!





  A transcreation of Rudyard Kipling's renowned poem "IF"





     

      

Saturday, 25 April 2026

INVICTUS

        Out of night that covers me

       Black as the pit from pole to pole 

     I thank whatever gods may be 

      For my unconquerable soul.


       In the fell clutch of circumstances 

   I have not winced nor cried aloud 

   Under the bludgeoning of chance 

   My head is bloody  but unbowed.


    Beyond the place of wrath and tears 

  Looms but the horror of shade

  And yet the menace of the years

 Finds and shall find me unafraid.


It matters not how strait the gate

 Charged with punishments the scroll

       I am the master of my fate

       I am the captain of my soul.


      William Ernest Henley 

      From the collection Life And Death

Thursday, 23 April 2026

Success Is Counted Sweetest...


                  सफलता सबसे अधिक  मीठी लगती उन्हें 

                  जिन्होंने कभी नहीं  चखा उसका स्वाद 

                  अमृत का आस्वादान करने के लिये - 

                   प्यास भी उतनी ही तीव्र होनी चाहिए न!


                 जीत का ध्वज  लिये लौटता -

                विजयी सेना का कोई भी सैनिक -

                नहीं कर सकता  जीत की ख़ुशी को -

                उस तरह परिभाषित -


              जैसा कि  युद्ध भूमि में घायल पड़ा -

             पराजित पक्ष का वह सैनिक -

             जो अपनी टूटती साँसों के बीच 

             विवश हो कर सुन रहा है --


             दूर -- शत्रु के शिविर से आ रही  -

            नितांत अवान्छित  और  कष्टदायी -

              विजयोत्सव के नगाड़ों की -

                  कर्कष  आवाज़ ...

           

           

                 


      ( A translation of Emily Dickinson's poem ) 


              

Sunday, 19 April 2026

जीना अकारथ नहीं होगा ...


   



जीना अकारथ नहीं होगा मेरा,

यदि रोक सकूँ एक भी दिल को -

टूटने से!


बँटा सकूँ किसी की पीड़ा को,

कम कर पाऊँ उसका दर्द-

  साझा करके!


ज़मीन पर गिर पड़े किसी पंछी को,

उसके घोंसले तक पहुँचने में कर सकूँ  --

थोड़ी सी मदद!


तो समझूँगी कि निष्फल  नहीं हुआ    --

 मेरा जीवन! 



A translation of Emily Dickinson's poem" I Shall Not Live In Vain " 








Sunday, 29 March 2026

No Man Is an Island

  कोई  भी मनुष्य नहीं है --

  अपने आप में  सम्पूर्ण और स्वतंत्र 

  किसी द्वीप  की तरह।


   वह तो मात्र अंश है --

  एक विशाल महाद्वीप का  -

 उसका एक  छोटा सा भूखंड.


जिसकी मुट्ठी भर मिट्टी भी -

 सागर की लहरें बहा ले जायें,

तो  धरती उतनी ही  क्षीण हो जाती है --


 जैसे कि  कोई  प्रायद्वीप खो गया हो,

जैसे  ढह गया हो तुम्हारे मित्र के घर का कोई हिस्सा ,

 या तुम्हारा अपना  ही घर ।


दुनिया के किसी कोने में -

किसी भी इंसान की मृत्यु -

मुझे  दुर्बल बना देती है।

क्योंकि मैं मानव -परिवार का एक अंग हूँ।


इसलिए  यह कभी नहीं पूछता 

कि चर्च की यह घंटी

 किसके मृत्यु -शोक में बज  रही है,


(जानता हूँ  उत्तर मिलेगा )

यह तुम्हारे लिये ही बज रही है!






अंग्रेज कवि जॉन डोन की सुविख्यात कविता "नो मैन  इज एन आइलैंड"  का भावानुवाद 




Friday, 13 February 2026

श्रीमद्भगवद् गीता : हिन्दी काव्य रूपान्तर




                                     1999 में प्रकाशित काव्य - कृति का नवीनतम संस्करण --

                                                 एक नये कलेवर में 

Monday, 26 January 2026

रचयिता का संक्षिप्त परिचय



                             नाम           --   स्व. ईश्वरी दत्त द्विवेदी                

                            पिता का नाम  --  स्व. पं. हरिदत्त द्विवेदी 'शास्त्री'

                             जन्मतिथि   ---      6 जुलाई, 1923 

                             शिक्षा      -------      हाई स्कूल 1942, मिशन स्कूल, देहरादून 

                            स्वाध्याय       ------  हिन्दी, अंग्रेज़ी साहित्यिक पुस्तकों एवं  संस्कृत धार्मिक ग्रंथों का सतत अध्ययन 

                       छात्र जीवन से ही काव्य रचना में रुचि, स्थानीय पत्र - पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन 

                     उत्तरप्रदेश पुलिस विभाग  में 1946 से 1981 तक सेवारत     

                      1981 में  कार्यालय अधीक्षक के पद से  अवकाश ग्रहण करने के पश्चात्  निम्नलिखित

                      रचनायें :---

                      1.   श्रीमद् भगवद् गीता  का हिन्दी काव्य रूपान्तर 

                       2.        कविवर नरोत्तम दास रचित सुदामा चरित का गढ़वाली भाषा में रूपान्तर 

                       3.        महाबली कुम्भकर्ण  --- खंड काव्य 

                       4.       हमारी कहानी  --- पारिवारिक परिवेश पर गद्यात्मक  कथ्य 

                      निधन.          13 दिसंबर, 2008