शायद मैं जानता हूँ उस आदमी को
जिसका यह जंगल है -
पास के गाँव में ही है उसका घर,
किन्तु वह देख नहीं पाएगा मेरा यहाँ रुकना -
और निहारना उसके बर्फ़ से ढके जंगल को.
मेरे घोड़े क़ो अवश्य ही अटपटा लगा होगा -
मेरा यहाँ अचानक रुक जाना,
आसपास कोई मकान भी तो नहीं -
जिसमें इस बर्फ़ से ढके जंगल और
जमी हुई झील के बीच,
वर्ष की सबसे अँधेरी रात गुज़ारी जा सके।
अपना सिर हिलाकर वह लगाम में लगी घंटियों को -
कुछ ऐसे बजा रहा है
मानो पूछना चाहता हो --
" क्या हो गया? अचानक क्यों रुक गए यहाँ "?
उस निर्जन वन में हवा की सरसराहट और
पेड़ों से बर्फ़ खिसकने की आवाज़ के सिवाय
और कोई आवाज़ नहीं थी।
हाँ, यह जंगल सचमुच बहुत सुन्दर है
घना और आकर्षक!
लेकिन मैं कैसे रुक सकता हूँ यहाँ?
मुझे तो बहुत सारे वादे निभाने हैं,
अभी मीलों चलना है
और मीलों तक चलना है,
सोने से पहले!
रोबर्ट फ्रॉस्ट की कविता Stopping by Woods on a snowy evening का भावानुवाद..
रोबर्ट फ्रॉस्ट की यह प्रसिद्ध कविता एक यात्री की मनः स्थिति को अभिव्यक्त करती है जो रास्ते में पड़ने वाले एक शांत,सुन्दर बर्फ़ से ढके जंगल मे पहुँचने पर सम्मोहित हो कर कुछ देर वहीं रुका रह जाता है.प्रकृति का सौंदर्य उसे रोकता है किन्तु जीवन के दायित्व और निभाये जाने वाले वादे उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं.
कविता की अंतिम पंक्तियाँ जीवन -यात्रा और उसके अंतिम विश्राम का गहन संकेत देती हैं. प्रकृति के सौंदर्य के प्रति आकर्षण और कर्त्तव्य -बोध के बीच का यह द्वन्द्व इस कविता को विशेष अर्थवत्ता प्रदान करता है।
यह भावानुवाद मूल रचना के इसी शांत, रहस्यमय और दार्शनिक भावलोक को प्रस्तुत करने का प्रयास है।




