करुणा!
एक सुकोमल भावना -
मानव- मन की गहराइयों में बसी -
शाश्वत अच्छाई।
जो कहीं दुःख, अन्याय -
या क्रूरता होते देख -
बह निकलती ह्रदय से अनायास -
हर अवरोध को नकारते हुए।
स्वर्ग से धरती पर उतरती -
वर्षा की बूँदों की तरह -
सुखद,शीतल और
सर्व - कल्याणकारी।
अपने अदृश्य आँचल में लिये आती
राहत और खुशियों की सौगातें -
जिन्हें बाँट देती भेदभाव बिना -
देने और लेने वाले दोनों में , बराबर।
शक्तियों में भी सर्वोत्तम है -
किसी सम्राट के ह्रदय में बसी करुणा -
जो बढ़ाती उसकी शोभा -
शीश पर सजे रत्न - मुकुट से भी अधिक।
राजदंड होता -
लौकिक सत्ता, राजसी वैभव -
और निरंकुश शक्ति का प्रतीक -
जो जगाये रखता जन -मन में -
राजसत्ता के प्रति भय - मिश्रित सम्मान।
किन्तु इन सब राजसी प्रतीकों से-
कहीं ऊँचा होता करुणा का स्थान-
वह निवास करती है स्वयं राजा के ह्रदय में -
ईश्वरीय गुण का स्वरुप धरे।
और प्रजा के लिये --
राजा का न्याय भी -
ईश्वरीय न्याय के समतुल्य बन जाता है -
जब मिला हो उसमें,
करुणा का अमृत - रस।
A Transcreation of William Shakespeare's "The Quality Of Mercy "





