1999 में प्रकाशित काव्य - कृति का नवीनतम संस्करण --
Induja
Friday, 13 February 2026
Monday, 26 January 2026
रचयिता का संक्षिप्त परिचय
नाम -- स्व. ईश्वरी दत्त द्विवेदी
पिता का नाम -- स्व. पं. हरिदत्त द्विवेदी 'शास्त्री'
जन्मतिथि --- 6 जुलाई, 1923
शिक्षा ------- हाई स्कूल 1942, मिशन स्कूल, देहरादून
स्वाध्याय ------ हिन्दी, अंग्रेज़ी साहित्यिक पुस्तकों एवं संस्कृत धार्मिक ग्रंथों का सतत अध्ययन
छात्र जीवन से ही काव्य रचना में रुचि, स्थानीय पत्र - पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन
उत्तरप्रदेश पुलिस विभाग में 1946 से 1981 तक सेवारत
1981 में कार्यालय अधीक्षक के पद से अवकाश ग्रहण करने के पश्चात् निम्नलिखित
रचनायें :---
1. श्रीमद् भगवद् गीता का हिन्दी काव्य रूपान्तर
2. कविवर नरोत्तम दास रचित सुदामा चरित का गढ़वाली भाषा में रूपान्तर
3. महाबली कुम्भकर्ण --- खंड काव्य
4. हमारी कहानी --- पारिवारिक परिवेश पर गद्यात्मक कथ्य
निधन. 13 दिसंबर, 2008
Sunday, 18 January 2026
Addition on page 12 अनुक्रमणिका
अध्याय विषय पृष्ठ संख्या
1. 14 ---- 21
2. 22 -- 36
3. 37 -- 45
4. 46 -- 54
5. 55. 61
6. 62 ---- 71
7. 72 --- 78
8. 79 ---- 85
9. 86 ----- 93
10. 94 --- 101
11. 102 ---- 115
12. 116 ----- 120
13. 121 ------- 128
14. 128 ----- 134
15. 135 ---- 140
16. 141 ------ 145
17. 146 ----- 151
18. 152 ------ 167
Saturday, 17 January 2026
Friday, 16 January 2026
Copyright page
श्रीमद भगवद गीता : हिन्दी काव्य रूपान्तर
प्रकाशक: ईश्वरी दत्त द्विवेदी
शिव पुर, कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल
उत्तराखंड
© लेखका धीन
इस पुस्तक के समस्त अधिकार सुरक्षित हैं। लेखक एवं प्रकाशक की पूर्व अनुमति के बिना इस पुस्तक का कोई भी अंश किसी भी रूप में पुनर्रप्रकाशित या प्रसारित नहीं किया जा सकता।
अस्वीकरण :
यह कृति श्रीमद् भगवद् गीता का हिंदी काव्य रूपान्तर है। इसका उद्देश्य मूल ग्रन्थ के दार्शनिक संदेशों को सरल एवं काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत करना है। यह किसी भी प्रकार की शास्त्रीय व्याख्या, मतान्तर या आधिकारिक भाष्य का दावा नहीं करती।
प्रथम संस्करण : -- 1999
द्वितीय संस्करण :-- 2009
तृतीय संस्करण :-- 2026
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मुद्रण स्थान
मुंबई, महाराष्ट्र
मुद्रक --
Wednesday, 14 January 2026
Saturday, 27 December 2025
धृतराष्ट्र की व्यथा
दिव्य - दृष्टि - वरदान प्राप्त तुम
वेदव्यास से हे संजय!
युद्ध - भूमि की गतिविधि मुझको
बतलाते जाओ निर्भय.
दुर्योधन की हठधर्मी, उस पर --
मेरी ममता की डोर
खींच ले गयी सारे कुल को --
महाकाल के मुख की ओर
कुरुक्षेत्र के धर्म -धाम में
होगा अब भीषण संग्राम
पाण्डु और मेरे पुत्रों का
क्या होगा संजय! परिणाम?
युद्ध नहीं यह महाकाल का --
होगा नृत्य भयंकर
याद दिलाएंगे युग - युग तक
रक्तवर्ण माटी प्रस्तर
लिखने वाला है क्रूर काल
कुरुकुल की करुण कहानी
मिटने वाली है भव्य राष्ट्र की
गौरवमयी कहानी
जो भी हो अब देख रहे जो --
सब कुछ मुझको बतलाओ
बना लिया पत्थर है मन को
यथा घटित कहते जाओ.
( गीतेतर -- क्षमा याचना सहित)


