Sunday, 30 August 2026
SUCCESS -- R. W. EMERSON
Saturday, 29 August 2026
ब्रह्म R.W. Emerson
यदि हन्ता यह समझता है कि वह मारता है
और जिसे मारा गया वह सोचता है
कि वह मारा गया,
तो वे अनभिज्ञ हैं मेरे सूक्ष्म विधान से -
जिसके प्रारम्भ, अंत और पुनरागमन में
मैं ही सम्मिलित हूँ.
मेरे निकट है वह भी जो मुझसे दूर है,
या भुलाया जा चुका है,
छाया या सूर्य का प्रकाश --
दोनों एक समान हैं मेरे लिए।
विलुप्त हो चुके देवताओं को भी -
देख लेता हूँ मैं।
यश - अपयश, मान - अपमान में
मेरे लिए कोई भेद नहीं।
वे भ्रम में हैं जो मुझे अपने से भिन्न समझते हैं
जब वे मुझसे दूर भागते हैं, तो -
उन्हें भगाने वाले पँख भी मैं ही हूँ,
मैं ही संदेह हूँ और संदेह करने वाला भी
और ब्राह्मण जिस मन्त्र का गान करते हैं
वह भी मैं ही हूँ।
शक्ति - संपन्न देवता भी आकुल हैं
मेरे धाम को पाने के लिए
और वे पवित्र सप्त - ऋषि भी तो
मेरी ही खोज में भटक रहे हैं।
किन्तु तुम, हे अच्छाई के विनम्र प्रेमी!
केवल मुझे ढूंढो और पीठ फेर लो -
स्वर्ग की ओर से।
परिचय : --
Brahma अमेरिकी दार्शनिक, निबंधकार और कवि राल्फ वालडो इमर्सन की
सुविख्यात दार्शनिक कविता है। भारतीय दर्शन, विशेषतः भगवद्गीता और उपनिषदों से प्रेरित यह कविता ब्रह्म की सर्वव्यापकता और आत्मा की अमरता की अवधारणा को व्यक्त करती है। इसमें जीवन और मृत्यु, विजेता और पराजित, निकट और दूर जैसे द्वन्दों से परे उस परम सत्य की कल्पना की गई है, जो समस्त सृष्टि में विद्यमान है. संक्षिप्त होते हुए भी यह कविता अत्यंत गहन आध्यात्मिक चिंतन से परिपूर्ण है और पूर्वी दर्शन के प्रति इमर्सन की गहरी अनुरक्ति को दर्शाती है।
Friday, 28 August 2026
Song Of Myself -1 ---- Walt Whitman (आत्म - गान )
मैं अपने आप का उत्सव मनाता हूँ,
स्वयं के गीत गाते हुए -
और समझता हूँ कि जो मैं मानता हूँ -
तुम भी वही मानते होगे,
क्योंकि हर परमाणु जो मुझमें है -
वह तुम्हारा भी उतना ही है -
जितना मेरा।
मैं विचरता रहता हूँ निरुद्देश्य, निश्चिंत --
और आमंत्रित करता हूँ अपनी आत्मा को।
कभी - कभी आराम से झुककर देखता हूँ
ग्रीष्म की घास के नुकीले सिरों को भी।
मेरी जिह्वा, मेरे रक्त की हर बूँद -
बनी है इसी मिट्टी से, इसी हवा से,
मैं संतान हूँ इसी मिट्टी में जन्मे माता - पिता की -
जिनके माता - पिता और उनके भी माता - पिता --
यहीं जन्मे थे।
मैं,सैंतीस वर्ष का पूर्ण स्वस्थ पुरुष,-
आशा करता हूँ कि जीवन - प्रवाह में -
इसी तरह बहता रहूँगा
जब तक मृत्यु आकर मुझे रोक न दे।
कुछ समय के लिए पीछे हट कर
उन धार्मिक सम्प्रदायों --
और सामाजिक मान्यताओं से -
जो पर्याप्त होते हुए भी -
अब प्रासंगिक नहीं रहे, किन्तु -
उन्हें अभी तक भुलाया नहीं गया है।
मैं प्रश्रय देता हूँ -
अच्छे और बुरे दोनों को ही -
और जोखिम उठा कर भी -
उन्हें बोलने की अनुमति देता हूँ -
पूरी स्वतंत्रता के साथ-
अपनी मौलिक ऊर्जा के साथ बहती हुई -
प्रकृति की तरह।
Song Of Myself ---- आत्म - गान --- वाल्ट व्हिटमैन की कविता का भावानुवाद
परिचय :--
Song Of Myself अमेरिकी कवि वाल्ट व्हिटमैन की महान काव्य -कृति Leaves of Grass
की सर्वाधिक चर्चित कविताओं में से एक है। इस कविता में कवि व्यक्ति और समस्त मानवता के बीच गहरे आत्मिक सम्बन्ध का उत्सव मनाता है.। व्हिटमैन का 'मैं ' केवल उसका व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव - समाज और प्रकृति का प्रतीक बन जाता है। यहाँ कविता आत्म--स्वीकृति, स्वतंत्रता, समानता और जीवन के प्रति उल्लासपूर्ण दृष्टि को व्यक्त करती है। मुक्त छंद में रचित यह कविता मानव की गरिमा तथा प्रत्येक जीवन के अद्वितीय महत्व का सन्देश देती है। Song of Myself आत्मा की व्यापकता और समस्त सृष्टि के साथ मनुष्य की एकात्मकता का सशक्त काव्य है।
Wednesday, 26 August 2026
On Love ---- Khalil Gibran
Monday, 24 August 2026
Do Not Live A Half Life -- Khalil Gibran
अधूरा जीवन मत जियो.
और न ही मरो अधूरी मृत्यु
शांत रहना चुनो
तो पूरी तरह शांत रहो
किन्तु जब बोलना हो
तो तब तक बोलते रहो
जब तक तुम्हारी बात
पूरी न हो जाए.
यदि स्वीकार करते हो किसी बात को
तो अपनी स्वीकृति को,
स्पष्ट रूप से व्यक्त करो
न कि किसी आवरण में छिपा कर।
यदि अस्वीकार करते हो
तो भी स्पष्ट रहो ऐसा करने में
क्योंकि अस्पष्ट अस्वीकार --
एक कमज़ोर स्वीकार जैसा ही होता है.
अधूरे समाधान को स्वीकार न करो
और न ही विश्वास करो अधूरे सत्य पर
अधूरे सपने मत देखो, और न कल्पना करो
अधूरी आशाओं के पूरे होने की।
अधूरा रास्ता तुम्हें कहीं नहीं पहुँचाएगा
याद रहे तुम स्वयं एक पूर्ण अस्तित्व हो
जो इस संसार में आया है
एक पूर्ण जीवन जीने के लिए
अधूरा रह जाने के लिए नहीं।
Do Not Live a Half Life
खलील जिब्रान (1883- 1931) की यह विचारोत्तेजक रचना मनुष्य को अधूरेपन, भय और अनिर्णय के साथ जीने से सावधान करती है। जिब्रान का सन्देश है कि जीवन को आधे मन से स्वीकार करने के बजाय व्यक्ति को अपने विचारों, सपनों और निर्णयों के प्रति निष्ठावान होना चाहिए। यह कविता हमें साहस, आत्मविश्वास और पूर्णता के साथ जीवन जीने कि प्रेरणा देती है और याद दिलाती है कि जीवन की सार्थकता केवल अस्तित्व में नहीं बल्कि सजगता और मनोयोग से जीने में है।
When I Run After what Think I want --- Rumi
जब - जब मैं भागता हूँ उन चीज़ों के पीछे -
जिन्हें मैं अपने लिए वांछनीय समझता हूँ -
तब -तब मेरा जीवन निराशा और भ्रम के-
अंधकार से भर जाता है।
किन्तु यदि उनके पीछे भागना बन्द कर -
ठहर जाता हूँ अपनी जगह धैर्य पूर्वक --
तो जो भी मुझे चाहिए --
मेरी ओर स्वतः ही प्रवाहित होने लगता है-
बिना किसी कष्ट के।
यह अनुभव मुझे सिखाता है
कि जिसे मैं पाना चाहता हूँ
वह भी आना चाहता है मेरे पास,
वह भी मुझे ढूँढ़ रहा है,
और खींच रहा है अपनी ओर।
एक गहरा रहस्य छिपा है इस बात में
उन सबके लिए -
जो इसे समझ सकते हैं।
सूफ़ी कवि रूमी की कविता का भावानुवाद
सूफ़ी संत कवि रूमी की यह चिंतनपरक रचना मनुष्य को इच्छाओं और उपलब्धियों के पीछे भागते रहने की प्रवृत्ति पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।रूमी के अनुसार बाहरी वस्तुओं और क्षणभंगुर सफलताओं की निरंतर खोज मन को अशांत करती है, जब कि जीवन की सच्ची सम्पन्नता आत्मिक संतुलन और सहजता में निहित है। यह कविता हमें अपने भीतर झाँकने, अनावश्यक दौड़ से बचने और जीवन के स्वाभाविक प्रवाह पर विश्वास रखने का सन्देश देती है।
Sunday, 23 August 2026
Let Go Of Your Worries - Rumi ---- अपनी चिंताओं को जाने दो
अपनी चिंताओं को जाने दो -
और बनो पूर्णतः निर्मल -हृदय -
एक दर्पण के सदृश -
जिसमें कोई छवि नहीं होती।
यदि तुम्हें एक स्वच्छ दर्पण चाहिए -
तो अपने आप को देखो -
और देखो उस निर्लज्ज सच्चाई को -
जो दर्पण तुम्हें दिखाता है।
और सोचो --
यदि धातु का एक टुकड़ा -
चमकाया जा सकता है -
एक दर्पण की तरह -
तो हृदय के दर्पण को चमकाने के लिए -
तुम्हें क्या चाहिए होगा?
सूफ़ी कवि जलालुद्दीन रूमी की कविता का भावानुवाद
सूफ़ी कवि जलालुद्दीन रूमी की यह प्रेरक रचना चिंता और भय से मुक्त होकर जीवन पर विश्वास करने का सन्देश देती है। मनुष्य प्रायः भविष्य की आशंकाओं और परिस्थितियों के बोझ से स्वयं को व्यथित कर देता है। रूमी हमें स्मरण कराते हैं कि हर क्षण को नियंत्रित करना हमारे वश में नहीं है, किन्तु विश्वास, धैर्य और समर्पण के साथ हम अपनी जीवन - यात्रा को सहज बना सकते हैं. यह कविता हमें ईश्वर तथा जीवन की व्यापक व्यवस्था पर भरोसा रखने का सन्देश देती हैं।






