किसी को भी यह प्रार्थना नहीं करनी चाहिए -
कि उसे कभी कोई दुःख न पहुँचे -
न ही यह कि वह सदा कष्टों से मुक्त रहे -
क्योंकि आज की कड़वाहट ही -
कल की मिठास है --
और एक पल की हानि -
हो सकती है जीवन भर का लाभ।
किसी वस्तु का अभाव उसी तरह --
द्विगुणित कर देता है उसके मूल्य को -
जैसे भूख की अग्नि बढा देती है -
भोजन से मिली तृप्ति का सुख।
सुख के आगमन पर केवल वही ह्रदय-
मना सकता है सच्चे आनंद का उत्सव,
जिसने दुखों और कष्टों का भरपूर --
अनुभव किया हो।
दुःख, अभाव, तड़प और संघर्ष की
कटु, कठोर परीक्षाओं से --
किसी भी मनुष्य को भागना नहीं चाहिए -
क्योंकि आत्मा के संगीत के सारे दुर्लभ राग -
जीवन के इन्ही छोटे छोटे स्वरों में -
मुखरित होते हैं।
Transcreated from the poem " Life's Harmonies " by -- Ella Wheeler Wilcox --1850--1919
एल्ला व्हीलर विलकॉक्स की यह कविता जीवन के सुख - दुःख,आशा - निराशा, और संघर्ष - विराम के बीच संतुलन को रेखांकित करती है. कवयित्री का विश्वास है कि जीवन की सम्पूर्णता केवल सुखद अनुभवों से नहीं बनती, इसके विविध और विपरीत अनुभव मिलकर ही जीवन का मधुर संगीत रचते हैं। जिस प्रकार संगीत में अलग - अलग स्वरों का सामंजस्य एक सुन्दर राग की रचना करता है, उसी प्रकार जीवन के प्रकाश और छाया, मिलन और विरह, सफलता और विफलता हमारे अनुभवों को सम्पूर्ण बनाते हैं। यह कविता हमें जीवन को उसकी समग्रता में स्वीकार करने तथा प्रत्येक परिस्थिति में निहित सौंदर्य और सीख को पहचानने की प्रेरणा देती है।

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