छोड़ो यह मंत्र- जाप , भजन- गान
और फेरना माला के मनकों का ।
मंदिर के बन्द द्वारों के अंदर -
इस निर्जन,अँधेरे कोने में बैठकर -
किसकी पूजा कर रहे हो तुम?
अपनी ऑंखें खोलो, और देखो --
तुम्हारा भगवान नहीं हैं
तुम्हारे सामने!
वह तो वहाँ है जहाँ कोई मजदूर
खोद रहा है कठोर भूमि को
और मार्ग बनाने वाला
तोड़ रहा है पत्थरों को
उन्हीं के साथ है तुम्हारा भगवान --
धूप में और वर्षा में -
और धूल से सन गए हैं उस के वस्त्र।
उस से मिलना हो तो -
अपनी पवित्र आवरण उतार कर -
चले आओ नीचे -
उसी धूल - मिट्टी में।
मुक्ति? कहाँ मिलने वाली हैं मुक्ति?
स्वयं हमारे प्रभु ने सहर्ष स्वीकार किए हैं -
इस सृष्टि के बंधन, और हम सब उसके साथ -
सदा, सदा के लिए बँधे हुए हैं
अपने ध्यान से बाहर आओ
अपने फूल और धूप
एक ओर रख दो।
क्या हानि है यदि तुम्हारे वस्त्र -
फट जाएँ और उन पर दाग पड़ जाएँ?
उस से मिलो --
और खड़े हो जाओ उसके साथ
परिश्रम में,
अपने माथे के पसीने में।
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