यदि हन्ता यह समझता है कि वह मारता है
और जिसे मारा गया वह सोचता है
कि वह मारा गया,
तो वे अनभिज्ञ हैं मेरे सूक्ष्म विधान से -
जिसके प्रारम्भ, अंत और पुनरागमन में
मैं ही सम्मिलित हूँ.
मेरे निकट है वह भी जो मुझसे दूर है,
या भुलाया जा चुका है,
छाया या सूर्य का प्रकाश --
दोनों एक समान हैं मेरे लिए।
विलुप्त हो चुके देवताओं को भी -
देख लेता हूँ मैं।
यश - अपयश, मान - अपमान में
मेरे लिए कोई भेद नहीं।
वे भ्रम में हैं जो मुझे अपने से भिन्न समझते हैं
जब वे मुझसे दूर भागते हैं, तो -
उन्हें भगाने वाले पँख भी मैं ही हूँ,
मैं ही संदेह हूँ और संदेह करने वाला भी
और ब्राह्मण जिस मन्त्र का गान करते हैं
वह भी मैं ही हूँ।
शक्ति - संपन्न देवता भी आकुल हैं
मेरे धाम को पाने के लिए
और वे पवित्र सप्त - ऋषि भी तो
मेरी ही खोज में भटक रहे हैं।
किन्तु तुम, हे अच्छाई के विनम्र प्रेमी!
केवल मुझे ढूंढो और पीठ फेर लो -
स्वर्ग की ओर से।
परिचय : --
Brahma अमेरिकी दार्शनिक, निबंधकार और कवि राल्फ वालडो इमर्सन की
सुविख्यात दार्शनिक कविता है। भारतीय दर्शन, विशेषतः भगवद्गीता और उपनिषदों से प्रेरित यह कविता ब्रह्म की सर्वव्यापकता और आत्मा की अमरता की अवधारणा को व्यक्त करती है। इसमें जीवन और मृत्यु, विजेता और पराजित, निकट और दूर जैसे द्वन्दों से परे उस परम सत्य की कल्पना की गई है, जो समस्त सृष्टि में विद्यमान है. संक्षिप्त होते हुए भी यह कविता अत्यंत गहन आध्यात्मिक चिंतन से परिपूर्ण है और पूर्वी दर्शन के प्रति इमर्सन की गहरी अनुरक्ति को दर्शाती है।






