तुम्हारे बच्चे
विश्वविख्यात
तुम्हारे बच्चे, तुम्हारे नहीं हैं, वे तो जीवन की अपनी आकांक्षाओं के -
पुत्र -पुत्रियाँ हैं।
वे दुनिया में आते हैं तुम्हारे माध्यम से
पर तुमसे नहीं,
और भले ही वे तुम्हारे साथ हैं--
तुम्हारा उन पर कोई अधिकार नहीं।
तुम उन्हें अपना प्रेम दे सकते हो -
किन्तु अपने विचार उन पर थोप नहीं सकते -
अपने जीवन में आश्रय दे सकते हो उनके शरीर को
किन्तु उनकी आत्मा को नहीं,
क्योंकि वह निवास करती है भविष्य के भवन में -
जहाँ तुम कभी नहीं जा सकते,-- स्वप्न में भी।
तुम उनके जैसा बनने का प्रयास कर सकते हो -
किन्तु उन्हें अपने जैसा बनाने की इच्छा न करना -
क्योंकि जीवन कभी पीछे की ओर नहीं जाता -
और न ही कभी ठहरता है --
बीते हुए कल के साथ।
तुम वह धनुष हो, जिसके द्वारा तुम्हारे बच्चे -
भेजे जाते हैं आगे, जीवंत बाणों की तरह -
वह अदृश्य धनुर्धर सुनिश्चित करता है -
अनंत पथ में कोई एक लक्ष्य --
और फिर साधता है तुम्हे अपनी शक्ति से इस तरह,
कि वेग से दूर तक जा सकें उसके बाण.
उस धनुर्धर के हाथों सौंप देना
तुम स्वयं को सहर्ष और
निश्चिन्त हो कर
क्योंकि वह तुम्हे भी उतना ही प्यार करता है
जितना उन दूर जाते बाणों को।
विश्वविख्यात कवि और दार्शनिक खलील जिब्रान की कविता ' On Children ' माता - पिता और संतान के सम्बन्धों को एक गहन और उदात्त दृष्टि से प्रस्तुत करती है। यह कविता उनकी प्रसिद्ध कृति The Prophet का एक महत्वपूर्ण अंश है।
कवि के अनुसार बच्चे माता - पिता के माध्यम से इस संसार में आते अवश्य हैं किन्तु उनकी व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होते।वे जीवन की अपनी स्वतंत्र धारा के प्रतिनिधि हैं और अपने समय, विचारों तथा अपने भविष्य की ओर अग्रसर होते हैं। माता - पिता का दायित्व उन्हें प्रेम, संरक्षण और संस्कार देना है परन्तु उनके व्यक्तित्व और स्वपनों को अपनी इच्छा के अनुरूप ढालना नहीं।
धनुष और बाण का सशक्त रूपक इस कविता की विशिष्ट साहित्यिक उपलब्धि है। माता - पिता धनुष की भाँति हैं और संतान भविष्य की ओर प्रस्थान करने वाले बाणों के समान --इस प्रकार यह रचना प्रेम, स्वतंत्रता और पीढ़ियों के बीच संबंधों की एक संवेदनशील व्याख्या प्रस्तुत करती है।