क्या यह पहाड़ी रास्ता
बार - बार मुड़ता जाएगा?
हाँ, अपने अंतिम पड़ाव तक।
क्या यह यात्रा
पूरे दिन चलती रहेगी?
हाँ, मेरे दोस्त, सुबह से शाम तक।
किन्तु रात में विश्राम के लिए
कोई ठौर तो होगा न?
हाँ, मिलेगी एक छत,
जब अंधेरा उतरने लगेगा।
क्या अँधेरे में
मैं उसे देख पाऊँगा?
तुम उसे अवश्य देख लोगे।
क्या वहाँ मुझे
कुछ और यात्री भी मिलेंगे?
हाँ, वे -
जो तुमसे पहले वहाँ पहुँच चुके हैं.
तो क्या मुझे
द्वार खटखटाना या उन्हें
पुकारना होगा?
नहीं, वे तुम्हें प्रतीक्षा नहीं कराएँगे।
क्या यात्रा की थकान मिटाने के लिए
वहाँ मुझे मिलेगी?
हाँ,
तुम्हारे श्रम का उचित प्रतिफल,
तुम्हें अवश्य मिलेगा।
क्या वहाँ और शैयायें भी होंगी
वहाँ आने वाले सब के लिए?
हाँ, उन सभी के लिए -
जो वहाँ आते हैं।
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