हँसो और सारी दुनिया हँसेगी तुम्हारे साथ
जब तुम हँसते हो -
तो सारा विश्व हँसता है तुम्हारे साथ
किन्तु जब रोते हो -
तो होते हो नितांत अकेले -
क्योंकि इस बूढी धरती को
जरुरत है अपने लिए खुशियों की,
कष्ट तो उसके आंचल में -
पहले ही बहुत हैं।
गाओ, और पहाड़ियाँ तुम्हें उत्तर देंगी
किन्तु तुम्हारी आहें तो
हवा में ही खो जाएँगी।
आनंदी स्वरों को ही मिलती हैं-
प्रतिध्वनियाँ,
दुखभरी आवाज़ की परवाह -
भला कौन करता है!
आनंद - उत्सव मनाओ,
और लोग ढूँढ लेंगे तुम्हें,
किन्तु जब शोक में होगे --
तो दूर चले जाएँगे पीठ फेर कर।
तुम्हारे आनंद में सभी चाहते हैं हिस्सा
किन्तु दुःख बँटाने को कोई नहीं आता आगे
तुम खुश हो तो मित्र अनेक होंगे तुम्हारे
किन्तु दुःख की घडियों में -
सभी छोड़ जाएँगे अकेला।
आनंद के विशाल कक्ष में
जगह होती बहुत सारे लोगों के लिए,
लम्बी, भव्य कतारों के लिए,
किन्तु दुःख के संकरे गलियारों में
अकेले ही गुज़रना होता है सब को
एक, एक करके।
Transcreated from the original poem "Laugh and the World Laughs with You" by Ella Wheeler Wilcox 1850-1919
अमेरिकी कवयित्री एला व्हीलर विलकॉक्स की इस लोकप्रिय कविता का मूल सन्देश सरल होते हुए भी बहुत गहरा है-- हमारे भाव और हमारा व्यवहार आस - पास के वातावरण को प्रभावित करते हैं. कवयित्री हँसी और प्रसन्नता को बाँटने की प्रेरणा देती हैं और बताती हैं कि आनंद साझा करने से बढ़ता है। इसके विपरीत, दुःख और एकांत का अनुभव प्रायः अधिक निजी और भीतर समाया हुआ होता है। यह कविता हमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और अपने व्यवहार से संसार में प्रसन्नता भरने का सन्देश देती है. इसकी सरल भाषा और लयात्मकता इसे आज भी अत्यंत प्रभावी बनाती है।
No comments:
Post a Comment