मैं जानता हूँ उस व्यक्ति को
जिसका यह जंगल है
शायद पास के गाँव में ही है उसका घर
किन्तु वह देख नहीं पाएगा मेरा यहाँ रुकना
और निहारना उसके बर्फ़ से ढके जंगल को.
मेरे घोड़े क़ो अवश्य अटपटा लगा होगा -
मेरा यहाँ अचानक रुक जाना,
आसपास कोई मकान भी तो नहीं -
जिसमें बर्फ़ से ढके जंगल और
जमी हुई झील के बीच,
साल की यह सबसे अँधेरी रात गुज़ारी जा सके।
अपना सिर हिलाकर वह लगाम में लगी घंटियों को -
कुछ ऐसे बजाता है,
मानो पूछ रहा हो -
क्या हो गया? अचानक रुक क्यों गए यहाँ?
उस निर्जन में अन्य कोई आवाज़ नहीं थी,
हवा की सरसराहट और पेड़ों से बर्फ़ खिसकने
की आवाज़ के सिवाय।
हाँ, यह जंगल सच मुच बहुत सुन्दर है
घना और आकर्षक!
लेकिन मैं कैसे रुक सकता हूँ यहाँ?
मुझे तो बहुत सारे वादे निभाने हैं,
अभी मीलों चलना है
और मीलों तक चलना है,
सोने से पहले!
रोबर्ट फ्रॉस्ट की कविता Stopping by Woods on a snowy evening का भावानुवाद..
