यदि तुम रख सको स्वयं को संयत -
जब तुम्हारे आस -पास के लोग -
आत्म - नियंत्रण खो रहे हों --
और मढ़ रहे हों सारा दोष तुम पर।
जब सब तुम पर संदेह करें -
किन्तु तुम बनाये रखो आत्मविश्वास -
उनके संदेह को भी -
ध्यान में रखते हुए।
तुम प्रतीक्षा करो बिना रुके,थके -
झूठ का शिकार बनने पर भी -
बदले में झूठ का सहारा न लो -
घृणा किये जाने पर भी -
घृणा करने से बच सको -
और कोशिश न करो कभी -
अत्यधिक भला और समझदार दिखने की।
यदि तुम सपने देखो -
किन्तु उनके वश में हो जाने से बचो -
विचारों का स्वागत तो करो -
किन्तु उनमें ही उलझकर न रह जाओ।
यदि हार और जीत दोनों को ही -
एक समान भ्रामक मान सको -
और करो दोनों स्थितियों को -
समभाव से स्वीकार।
यदि सह सको अपनी कही सत्य बातों को -
किन्ही कुटिल जनों द्वारा -
तोड़ मरोड़ कर, भोले लोगों को -
फँसाने हेतु प्रयोग होते देखना।
यदि जीवन भर के परिश्रम से बनी -
चीजों को टूटा देख,
बिना विचलित हुए झुक कर -
जुट सको उन्हें फिर से जोड़ने में।
यदि अपनी सारी कमाई को इकठ्ठा कर -
हार या जीत के लिये --
एक साथ दाँव पर लगा सको,
और सब कुछ हार बैठो।
किन्तु फिर भी सब भूलकर -
कर सको एक नई शुरुआत -
अपने भारी नुकसान का -
ज़िक्र तक किये बिना ।
यदि तन, मन और मस्तिष्क को -
उनके थक जाने के बाद भी -
काम पर लगाए रखो -
और बने रहो उनके साथ।
जब तक शेष न हो जाये -
तुम्हारी अपनी संकल्प शक्ति -
जो कहती रहती है निरंतर -
" रुको मत, डटे रहो "।
यदि तुम भीड़ के बीच भी -
अपने गुण बनाये रख सको -
और राजाओं की संगति में भी -
बने रहो साधारण जन।
यदि आहत न कर पायें -
तुम्हें तुम्हारे शत्रु -
अथवा परम स्नेही मित्र -
तुम विश्वास करो सब पर -
किन्तु अत्यधिक किसी पर नहीं।
अपने अमूल्य समय के हर मिनट की -
पूरे साठ क्षणों की अवधि को -
सार्थकता से भर कर सको,
तो यह धरती, और उस पर जो कुछ है -
सब तुम्हारा हो जायेगा -
और उस से भी बढ़ कर -
तुम बन जाओगे एक सच्चे मनुष्य,
मेरे प्यारे बेटे!!
A transcreation of Rudyard Kipling's (1865-1936) renowned poem "IF"
यह कविता जीवन के लिए धैर्य, आत्म - संयम, साहस और संतुलित व्यक्तित्व का सन्देश प्रस्तुत करती है। कविता में सफलता और विफलता, विजय और पराजय, विश्वास और संदेह -- इन सभी के बीच संतुलन बनाऐ रखने की सीख दी गई है। कवि के अनुसार सच्ची परिपक्वता केवल उपाधियाँ अर्जित करने में नहीं, अपितु विपरीत परिस्थितियों में आत्म - विश्वास बनाए रखने में है। कविता का स्वर प्रेरक होने के साथ-साथ गहरे मानवीय अनुशासन की ओर संकेत करता है। यह पाठक को परिस्थितियों से ऊपर उठ कर संयम, दृढ़ता और गरिमा के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

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