Thursday, 15 October 2026

याचना -- गीतांजलि -- 38

 हे मेरे प्रभु!

तुमसे विनती है कि -

 मेरे हृदय की दरिद्रता को -

समूल मिटा डालो -

उस पर बार - बार प्रहार करके।


शक्ति दो मुझे देव -

सुख - दुःख दोनों को ही -

समान भाव से सहज रहकर -

सहन करने की।


शक्ति दो कि निर्बलों, निर्धनों से -

कभी विमुख न होऊँ -

और न कभी घुटने टेकूँ -

धृष्ट और दम्भी शक्तियों के समक्ष।


यह भी कि मन - मस्तिष्क को -

ऊपर उठा सकूँ -

नित्य प्रति की क्षुद्र बातों से -

और रह सकूँ उनसे  अप्रभावित।


शक्ति दो कि अपने प्रेम को -

सेवा में फलीभूत कर सकूँ,

कर सकूँ स्वयं को तुम्हें समर्पित -

सम्पूर्ण प्रेम के साथ।


गीतांजलि --38

हिन्दी भावानुवाद 





 

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