क्योंकि मैं रुक नहीं सकती थी मृत्यु के लिए..
दुनियादारी के चक्र में बँधी -
मैं बस चलती चली जा रही थी -
मानो रुकने की तो क्या -
मरने की भी फुर्सत -
नहीं थी मेरे पास।
तभी वह सौम्य सा सारथि --
स्वयं मेरे पास आ रुका -
मुझे अपने साथ चलने का -
स्नेहिल निमंत्रण देता हुआ।
उसके रथ में यूँ तो हम दो ही थे -
किन्तु कोई एक और भी -
अदृश्य रूप में उपस्थित थी वहाँ -
सर्व-कालिक, अशरीरी और-
चिर -रहस्यमयी -- "अमरता "।
हम धीरे, धीरे आगे बढ़ते रहे -
उसे कोई जल्दी नहीं थी --
और उसके सौजन्यपूर्ण निमंत्रण पर -
मैं भी पीछे छोड़ आई थी -
अपनी सारी व्यस्ततायें और आकांक्षायें।
हम गुज़रे एक स्कूल के पास से -
जहाँ भोजनावकाश में -
गोल घेरा बनाकर -
हँसते, खेलते बच्चे -
एक दूसरे से होड़ लगा रहे थे।
फिर और आगे बढ़े -
पके हुए धान के खेतों के पास से -
डूबते हुए सूरज को पीछे छोड़ते हुए -
या शायद वही हमें छोड़ कर चला गया था।
गहराते अँधेरे के साथ -
ओस की बूँदें गिरने लगीं थीं -
सिर्फ एक पतले गाउन और हल्के स्कार्फ में -
ठण्ड से सिहरने लगीं थी मैं.
तभी हम आकर रुक गये -
एक ऐसे घर के सामने -
जो धरती पर बस एक उभार सा लगता था -
जिसकी छत भी मुश्किल से दिखती थी -
और नींव तो मानो कहीं गहराई में दबी हो।
उस दिन के बाद न जाने -
कितनी सदियाँ बीत गयी हैं -
फिर भी लगता है मानों वह सब -
कल की ही बात हो।
उसी दिन मैंने जाना था यह रहस्य
कि उस रथ के घोड़ों के मुख -
अमरत्व की दिशा में थे जहाँ --
मेरा अपना ही स्थायी घर था, --
चिर - विश्राम के लिये।
Emily Dickinson's (1830- 1886 ) की कविता --"Because I could Not Stop For Death"--मृत्यु और समय के रहस्य पर आधारित उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कविताओं में से एक है। कवयित्री मृत्यु को भयावह रूप में प्रस्तुत करने के बजाय एक शांत और विनम्र सहयात्री के रूप में देखती है जो जीवन - यात्रा को एक अन्य आयाम की ओर ले जाती है। यात्रा के विभिन्न दृश्य जीवन की अलग - अलग अवस्थाओं और समय के अनवरत प्रवाह का प्रतीक बन जाते हैं। कविता मृत्यु के प्रति एक गहन, शांत और दार्शनिक दृष्टि प्रस्तुत करती है तथा जीवन की क्षणभंग़ु रता और अनंतता के रहस्य पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

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