करुणा!
एक सुकोमल भावना -
मानव- मन की गहराइयों में बसी -
शाश्वत अच्छाई।
कहीं दुःख, अन्याय -
या क्रूरता होते देख अनायास
बह निकलती ह्रदय से-
हर अवरोध को -
नकारते हुए।
वह होती -
स्वर्ग से धरती पर उतरती -
वर्षा की बूँदों की तरह निःशब्द
किन्तु सुखद,शीतल और
कल्याणकारी।
अपने अदृश्य आँचल में लिये आती
राहत और खुशियों की सौगातें -
जिन्हें बाँट देती भेदभाव बिना -
देने और लेने वाले दोनों में ,
बराबर।
शक्तियों में भी सर्वोत्तम है -
किसी सम्राट के ह्रदय में बसी करुणा -
जो बढ़ाती उसकी शोभा -
उसके शीश पर सजे
रत्न - मुकुट से भी अधिक।
राजदंड होता -
लौकिक सत्ता, राजसी वैभव -
और निरंकुश शक्ति का प्रतीक -
जो जगाये रखता जन -मन में -
राजसत्ता के प्रति भय - मिश्रित सम्मान।
इन सब राजसी प्रतीकों से-
कहीं ऊँचा होता करुणा का स्थान-
वह निवास करती है
स्वयं राजा के ह्रदय में -
ईश्वरीय गुण का स्वरुप धर कर ।
और प्रजा के लिये --
राजा का न्याय भी बन जाता-
ईश्वरीय न्याय के समतुल्य -
जब मिला हो उसमें,
करुणा का अमृत - रस।
A Transcreation of William Shakespeare's "The Quality Of Mercy "
The Quality Of Mercy -- William Shakespeare --- 1564--1616
शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक The Merchant of Venice से लिया गया यह काव्यांश करुणा और क्षमा के मानवीय मूल्य को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। कवि के अनुसार सच्ची करुणा किसी बाहरी दबाव या आदेश से नहीं, अपितु ह्रदय की सहज उदारता से जन्म लेती है। वह देने वाले और पाने वाले -- दोनों को समृद्ध करती है। जहाँ न्याय दंड और अधिकार की बात करता है, वहीं करुणा मनुष्य को उसके उदात्त स्वरुप से परिचित कराती है. यह कविता हमें बताती है कि शक्ति का सर्वोत्तम रूप कठोरता में नहीं, अपितु क्षमा करने की क्षमता में निहित है।

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