Thursday, 11 June 2026

करुणा की शक्ति

     करुणा! 

एक सुकोमल भावना -


मानव- मन  की गहराइयों में बसी -

  शाश्वत अच्छाई।


 कहीं दुःख, अन्याय -

या क्रूरता होते  देख अनायास 

बह निकलती ह्रदय से-

हर अवरोध को -

नकारते हुए।


वह होती -

स्वर्ग से धरती पर उतरती -

वर्षा की  बूँदों की तरह  निःशब्द 

किन्तु सुखद,शीतल और 

  कल्याणकारी।


अपने अदृश्य आँचल में लिये आती 

राहत और खुशियों की सौगातें -

जिन्हें बाँट देती भेदभाव बिना -

देने और लेने वाले दोनों में ,

 बराबर।


शक्तियों में भी सर्वोत्तम है -

  किसी सम्राट के ह्रदय में बसी करुणा -

 जो बढ़ाती उसकी शोभा -

 उसके शीश पर सजे 

रत्न - मुकुट से भी अधिक।


 राजदंड होता -

लौकिक सत्ता, राजसी वैभव -

और निरंकुश शक्ति का प्रतीक -

जो जगाये रखता जन -मन में -

राजसत्ता के प्रति भय - मिश्रित सम्मान।


 इन सब राजसी प्रतीकों से-

कहीं ऊँचा होता करुणा का स्थान-

वह निवास करती है

 स्वयं राजा के ह्रदय में -

ईश्वरीय गुण का स्वरुप धर कर ।


और  प्रजा के लिये  --

राजा का न्याय भी बन जाता-

 ईश्वरीय  न्याय  के समतुल्य -

जब  मिला हो  उसमें,

करुणा का अमृत - रस।



A Transcreation of  William Shakespeare's   "The Quality Of Mercy "



 

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