मैं देखता हूँ सपना
एक ऐसी दुनिया का-
जहाँ एक इंसान दूसरे इंसान से -
नफरत न करता हो.
जहाँ प्रेम - रस से भीगी हो सारी धरती -
और रास्ते सजे हों अनुपम शांति से।
मैं देखता हूँ एक ऐसी दुनिया का स्वप्न -
जहाँ हर किसी को मिले पूर्ण स्वतंत्रता -
जहाँ धन - लिप्सा आत्मा को दुर्बल न बना दे -
और लोलुपता न बन जाये -
जीवन का अभिशाप!
जहाँ लेश मात्र भी रंग भेद न हो -
और उदारता से बँटते हों सबमें
धरती के अनुपम उपहार.
जहाँ हर मनुष्य स्वतंत्र हो अपने जीवन में -
दुष्टता शर्मिंदा होकर सर झुकाये खड़ी हो,
और ख़ुशी, अनमोल मोतियों की तरह -e
मानव -मात्र की जरूरतों को -
पूरा करने में जुटी हो।
हाँ, एक ऐसी ही दुनिया का स्वप्न देखता हूँ मैं
ऐसी ही दुनिया का!!
I Dream a World - Langston Hughes (1901-- 1967)
I Dream a World में कवि एक ऐसे संसार का स्वप्न देखता है जहाँ प्रेम, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा का वास हो। कवि का स्वप्न किसी एक व्यक्ति या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त मानवता के लिए है। यहाँ ऐसे समाज की कल्पना की गई है जहाँ घृणा, भेदभाव और अन्याय के स्थान पर भाईचारा और पारस्परिक सम्मान हो। ऐसे आदर्श संसार की कल्पना के माध्यम से कवि मानवता की श्रेष्ठ संभवनाओं में अपना विश्वास व्यक्त करता है। यह रचना आशा, समानता और शांतिपूर्ण सह - अस्तित्व का सुन्दर काव्यात्मक घोष है.

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