Wednesday, 3 June 2026

यदि तुम मुझे भूल जाओ

  सुनो! 

मैं चाहता हूँ 


कि एक बात अच्छी तरह समझ लो तुम 

कि जब भी मैं देखता हूँ 

अपनी खिड़की से 

बर्फ़ से ढकी टहनी पर टिके 

 शीशे जैसे चमकते चाँद को 


कभी आग के पास बैठा,

छूने की कोशिश करता हूँ,

राख की नाजुक, सफ़ेद परतों -

या लकड़ी के कुंदे की जली हुई देह पर -

उभर आई झुर्रियों को।


इस सब के बीच न जाने क्यों 

मेरा मन अनायास ही 

 खिंचा चला जाता है 

 तुम्हारी  ओर।


मानों दुनिया की हर एक चीज़ 

और वह हर चीज़ जो मेरे आस - पास है --

खुशबू, रौशनी और धातुओं की चमक 

सब मिलकर छोटी -छोटी नावें बन गई हों 

मुझे तुम्हारे उन द्वीपों की ओर ले जाने के लिये 

जहाँ तुम मेरी प्रतीक्षा में हो ।


और अब, इस के उलट --

यदि तुम धीरे, धीरे 

मुझे प्रेम करना बंद कर दोगी 

तो सच मानो, मैं भी वही करूँगा 

 ठीक तुम्हारी तरह,

  धीरे, धीरे।

    

  और हाँ, 

यदि तुम अचानक ही मुझे भूल जाओ 

तो फिर कभी मुझे मिलने की 

उम्मीद न रखना, क्योंकि मैं 

पहले ही भूल चुका होऊँगा तुम्हें।


यदि तुम्हे बहुत मेरा जीवन - संघर्ष 

कुछ अधिक ही लम्बा और उन्मादी  लगे 

और विचलित करें निरंतर झिँझोड़ती 

तूफानी हवायें.

कि तुम आगे न चलना चाहो मेरे साथ,

और छोड़ कर चली जाओ  मुझे-

 उसी जगह जहाँ मेरी जड़ें  

 गहराई  तक गड़ी हुई हैं।


  याद रहे कि --

ठीक उसी दिन, 

उसी बेला,

मैं अपना सब कुछ समेट कर 

  चल दूँगा,

  किसी नये साथी -की तलाश में।


 किन्तु यदि  तुम --

 हर दिन, हर घड़ी,

यह महसूस करो 

कि अपनी अडिग मधुरता के साथ 

नियति ने तुम्हें बनाया है 

मुझसे ही जुड़ने के लिये।



यदि हर दिन कोई फूल 

तुम्हारे होंठों तक पहुँच जाये 

 मुझे ढूँढते  हुए --

तो, हे मेरी प्रिया!

मेरे प्रेम  की लौ फिर जगमगा उठेगी 

मानों कि कुछ भी न तो बुझा था,

न ही भुलाया गया।


  मेरा प्रेम तुम्हारे ही प्रेम से पुष्ट होता है, प्रिये 

  और जब तक तुम इस दुनिया में हो,

    तुमसे बँधा रहेगा जीवन भर 

   अपने समूचे अस्तित्व के साथ।



(नोबेल पुरस्कार विजेता पाबलो नेरुदा की कविता का भावानुवाद )



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