Sunday, 7 June 2026

Dreams -- Langston Hughes

             अपने सपनों को जीवित रखो 

             प्राणपण से रक्षा करो उनकी 


              उनके  निष्प्राण हो जाने से-

              अक्षम हो जायेगा तुम्हारा जीवन,

              उस टूटे पंखों वाली चिड़िया की तरह

              जो चाह कर भी उड़ नहीं सकती।


           मजबूती से पकड़े रहो  उनको 

           यदि  वे फिसल गये हाथों से 

          तो तुम्हारा जीवन  बन जायेगा 

        बर्फ़ में दबे खेतोँ जैसा  अनुर्वर 

          जिसमें कुछ भी उग नहीं सकता।

           


            धन की  सीमाओं का सत्य तो बता चुके हैं 

             ईसा से लेकर गाँधी तक 

           क्या असीसी के संत फ्रांसिस भी 

            सिद्ध नहीं करते इसकी निस्सारता?


           अच्छाई  की  गरिमा अनायास ही -

           पीछे छोड़ देती है राज -शक्तियों को 

          करुणा का प्रभामण्डल चमकता है -

          रत्नजटित सोने के मुकुट से अधिक,

          और प्रेम के ओस कण धूमिल कर देते हैं -

          हीरे की  आभा को भी -

         अपनी  अप्रतिम जगमगाहट से।



         Langston Hughes   (1901------  1967)  की  कविता 'Dreams' का भावानुवाद 

         Swapnonलैंगस्टन ह्युज की यह संक्षिप्त किन्तु प्रभावशाली कविता मनुष्य के जीवन में सपनों की अनिवार्यता को रेखांकित करती है। कवि के लिए सपने केवल कल्पनाएं नहीं, बल्कि जीवन को दिशा और अर्थ देने वाली आतंरिक ऊर्जा हैं। जब मनुष्य अपने सपनों को त्याग देता है तो जीवन अपनी उड़ान और संभावनाएँ खोने लगता है। कविता का सरल कथ्य एक गहरा सन्देश देता है --परिस्थितियाँ चाहे कितनी ही कठिन हों, आशा और सपनों को जीवित रखना आवश्यक है. यह कविता पाठक को अपने भीतर के उस प्रकाश को बचाए रखने की प्रेरणा देती है, जो उसे आगे बढ़ने का साहस देता है.

          

    

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