जीना अकारथ नहीं होगा मेरा,
यदि रोक सकूँ एक भी दिल को -
टूटने से!
बँटा सकूँ किसी की पीड़ा को,
कम कर पाऊँ साझा करके!
ज़मीन पर गिर पड़े किसी पंछी को,
Rउसके घोंसले तक पहुँचने में कर सकूँ --
थोड़ी सी मदद!
तो समझूँगी कि निष्फल नहीं हुआ --
मेरा जीवन!
A transcreation of Emily Dickinson's poem" I Shall Not Live In Vain "
यह कविता जीवन के अर्थ को किसी महान उपलब्धि से नहीं, अपितु किसी दूसरे के जीवन को स्पर्श कर सकने की क्षमता में खोजती है। यदि किसीके छोटे से प्रयास से किसी
पीड़ित हृदय को राहत मिले, किसी पक्षी को सहारा मिले, या किसी के जीवन में आशा का संचार हो तो उस मनुष्य का जीना सार्थक हो जाता है।कविता का सौंदर्य इसकी विनम्र मानवीय दृष्टि में है. यह हमें बताती है कि जीवन की सार्थकता हमेशा बड़े कार्यों में नहीं होती, संवेदना से किया गया एक छोटा सा कार्य भी किसी के लिए बहुत बड़ा अर्थ रख सकता है।
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