Sunday, 29 March 2026

No Man Is an Island

  कोई  भी मनुष्य नहीं है --

  अपने आप में  सम्पूर्ण और स्वतंत्र 

  किसी द्वीप  की तरह।


   वह तो मात्र अंश है --

  एक विशाल महाद्वीप का  -

 उसका एक  छोटा सा भूखंड.


जिसकी मुट्ठी भर मिट्टी भी -

 सागर की लहरें बहा ले जायें,

तो  धरती उतनी ही  क्षीण हो जाती है --


 जैसे कि  कोई  प्रायद्वीप खो गया हो,

जैसे  ढह गया हो तुम्हारे मित्र के घर का कोई हिस्सा ,

 या तुम्हारा अपना  ही घर ।


दुनिया के किसी कोने में -

किसी भी इंसान की मृत्यु -

मुझे  दुर्बल बना देती है।

क्योंकि मैं मानव -परिवार का एक अंग हूँ।


इसलिए  यह कभी नहीं पूछता 

कि चर्च की यह घंटी

 किसके मृत्यु -शोक में बज  रही है,


(जानता हूँ  उत्तर मिलेगा )

यह तुम्हारे लिये ही बज रही है!






अंग्रेज कवि जॉन डोन की सुविख्यात कविता "नो मैन  इज एन आइलैंड"  का भावानुवाद 

जॉन डन की यह प्रसिद्ध कविता मानव - एकता और पारस्परिक संबंधों का गहरा सन्देश देती है।कवि कहता है कि कोई भी मनुष्य अपने आप में पूर्णतः अकेला या स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है, हम सभी एक - दूसरे से जुड़े हुए हैं। एक व्यक्ति का दुःख अथवा हानि समस्त मानवता को प्रभावित करती हैं। यह कविता करुणा, सह - अस्तित्व और मानवीय संवेदना का महत्व रेखांकित करती है तथा हमें सन्देश देती है कि मानवमात्र की वास्तविक शक्ति एक -दूसरे से जुड़े रहने में ही है।



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