Sunday, 29 March 2026

No Man Is an Island

यहाँ  कोई  भी मनुष्य एक द्वीप नहीं है --

  अपने आप में  स्वतंत्र और सम्पूर्ण।

हर  व्यक्ति बस  एक छोटा सा भाग है 

एक विशाल महाद्वीप  का।


जिसकी एक मुट्ठी भर मिट्टी भी -

सागर की लहरें बहा ले जायें,

तो सारा देश ही घट जायेगा  --


 मानो कोई प्रायद्वीप बह गया हो,

जैसे बह गया हो तुम्हारे मित्र के घर का कोई हिस्सा ,

    या तुम्हारा अपना  ही घर ।


दुनिया के किसी कोने में -

किसी भी इंसान की मृत्यु -

मुझे  व्यथित और दुर्बल बना देती है।


क्योंकि मैं सम्पूर्ण मानव -परिवार का एक अंग हूँ।

इसलिए  यह पूछना जरूरी नहीं लगता  -

कि चर्च  का यह घंटा किसके मृत्यु शोक में बज रहा है,


 जानता हूँ  --

यह तुम्हारे लिये  ही बज रहा है!



अंग्रेज कवि जॉन डोन की सुविख्यात कविता "नो मैन  इज एन आइलैंड"  का भावानुवाद 




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